निर्भया के दोषियों की मौत की सजा बरकरार

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हुए पूरे देश को झकझोर देने वाले निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी है। गौरतलब है की इस मामले के दोषी अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश ने इस सजा को अदालत में चुनौती दी थी। इससे पहले, अदालत ने 27 मार्च को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते यह मेसेज देने की कोशिश की है कि इस तरह के बर्बरतापूर्ण अपराध के लिए नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है।

पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस फैसले पर सबकी नजर थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखने का जैसे ही फैसला सुनाया तो कोर्ट तालियों की आवाज़ से गूंज गया। न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने विस्तार से फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि इस केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। कोर्ट ने माना कि इस मामले में अमीकस क्यूरी की ओर से दी गई दलीलें अपराधियों को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।

बता दें कि जस्टिस दीपक मिश्रा का दिल पसीजने की उम्मीद बेहद कम थी क्योंकि वह महिलाओं के मामलों को लेकर बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने एक फैसला दिया, जिसमें उन्होंने कहा, ‘किसी महिला को प्रेम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उसके पास हमेशा ना कहने का अधिकार है।’

क्या है पूरी घटना
16 दिसंबर 2012 की रात देश की राजधानी दिल्ली में 6 लोगों ने 23 साल की मेडिकल स्टूडेंट के साथ चलती बस में गैंगरेप किया। दोषियों में एक 17 साल का नाबालिग भी शामिल था। पीड़ित अपने दोस्त के साथ मूवी देखने के बाद घर वापस लौट रही थी। वे गंतव्य तक जाने के लिए बस में सवार हुए, जहां आरोपियों ने उसके दोस्त की पिटाई की और वहशियाना ढंग से पीड़ित के साथ गैंगरेप किया। 29 दिसंबर को पीड़ित की मौत हो गई। ट्रायल के दौरान एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली थी जबकि छठा आरोपी नाबालिग था, जिसे 3 साल तक जूवेनाइल होम में रखने का आदेश दिया गया था।

साकेत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इन चारों को गैंगरेप और हत्या के लिए दोषी करार दिया था। 13 सितंबर, 2013 को चारों को हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई गई थी और कोर्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना था।

इसके बाद इन्होंने हाई कोर्ट में अपील की थी और हाई कोर्ट से भी इनकी फांसी की सजा बरकरार रखी गई। इसके बाद इनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में चारों मुजरिमों ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दे रखी है।

सुप्रीम कोर्ट में 4 अप्रैल 2016 में बहस शुरू हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चारों दोषियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन और एडवोकेट संजय हेगड़े को दोषियों के बचाव के लिए एमिकस क्यूरी बनाया।

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