जल माफियाओं की बल्ले-बल्ले

रेल नीर में सेंध लगाते जल माफिया

20 लीटर पानी 30 से 40 रुपये में

फैजुल शेख / मुंबई। हर साल गर्मी आते ही मुंबई और आस- पास के इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर अनियमित बस्तियों के रहिवासियों पर पड़ता है। उन्हें मनपा या नपा से पानी नहीं मिलता है, न ही वे किसी रजिस्टर्ड सोसायटी का हिस्सा होते हैं, जहां पानी की सुविधा देना सोसायटी की जिम्मेदारी हो।

इन लोगों को पानी मुहैया कराना प्रशासन के लिए बेहद टेढ़ी खीर साबित होती है, इसीका फायदा जल माफिया उठाते हैं। इन दिनों कुछ ऐसा ही हाल मुंबई के पश्चिमी एवं पूर्वी उपनगरों के अलावा पहाड़ी इलाके एवं स्लम में दिखा जा रहा है।

गौरतलब है कि मुंबई से सटे मीरा-भाईंदर, वसई-विरार और ठाणे-कल्याण में तो पानी की किल्लत और अधिक है। यहां आए दिन लोगों द्वारा मनपा मुख्यालय के सामने हंडा-बर्तन लेकर टैंकर माफियाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर पानी मुहैया करवाने की मांग हो रही है।

वहीं मालवणी पुलिस ने कई वॉटर माफियाओं के खिलाफ मामले भी दर्ज किए हैं। गोरेगांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता फरीद शेख बताते हैं,’ गर्मी आते ही वॉटर माफिया सक्रिय हो जाते हैं। पश्चिमी उपनगर में मालवणी का अंबुजवाडी, गोरेगांव का प्रेम नगर, मालाड का अप्पापाडा इलाका, कांदिवली का दामू नगर का क्षेत्र, बोरिवली का रावलपाडा और दहिसर का देवीपाडा व ऊपरी पहाड़ी इलाका है, इन इलाकों में पानी की बेहद किल्लत है।

वहीं जल माफिया से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ऐसे इलाकों में मनपा के जल विभाग के अधिकारियों से सेटिंग कर एक के बाद एक कई टैंकरों का पानी की धड़ल्ले से बेचने का काम करते हैं। जो कि प्रति गैलन 20 रुपये से 50 रुपये तक बेचा जाता है। जबकि सोसायटियों में 1600 से 3400 रुपये प्रति टैंकर पानी की सप्लाई की जाती करते है।

वहीं बिल्डरों की साइट्स इसकी कीमत दोहरी हो जाती है। कुल मिलाकर इनके निशाने पर वे झोपड़पट्टियां हैं, जो अवैध तरीके से कलेवटर, मनपा या म्हाडा की जमीन पर बनी हैं। ऐसे इलाके के लोगों को पानी, बिजली की सुविधा न के बराबर है। ऐसे जगहों पर पानी बेचने वाले गिरोह का धंधा काफी फलता-फूलता है।

उल्लेखनीय है कि जल माफियाओं का यह खेल रात के अंधेरे में होता है। चाहे वह बोरीवली का लिंक रोड हो या फिर कांदिवली में रघुलीला मॉल के सामने मनपा गार्डन के पास का पाइप लाइन, शिवाजी नगर का लल्लू भाई कंपाउंड हो या अंधेरी का मरोल, सिप्ज गांव यहां तक कि आरे कॉलोनी के अंदरूनी हिस्से में कई वॉटर फिलिंग पॉइंट्स (पानी भरने का अच्छा) हैं, जहां गैरकानूनी तरीके से टैंकर में पानी भरकर माफियाओं द्वारा गली-मोहल्लों और झोपड़पट्टियों व सोसायटियों में बेच कर मोटी कमाई करते हैं।

सूत्रों के अनुसार, पानी भरने का काम अधिकतर रात के अंधेरे में होता है, ताकि गैरसरकारी संगठनों एवं आम लोगों की नजरों से बचा जा सके। हालांकि, मनपा, नगरपालिका और स्थानीय पुलिस, पहले से ही मैनेज रहती हैं, इस वजह से उन्हें पानी चुराकर टैंकरों में भरने एवं जरूरतमंद लोगों को बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती है। वसई-विरार में सर्वाधिक जल चोरी होती है।

जानकारी के मुताबिक, जो नई इमारतें बनी हैं या बन रही हैं, उन्हें नगरपालिका पानी की नई लाइन नहीं दे रही है। कई जगहों में तो पिछले 3 सालों से नया कनेक्शन देना बंद है। लोड बेरिंग वाले अवैध इमारतों में रहने वाले टैंकर का पानी लेते हैं। अधिकांश जगहों के नागरीक पीने का पानी प्रति 20 लीटर 30 रुपये में खरीदने को मजबूर हैं।

वसई में बोइदा पाड़ा, खैरपाडा, वालीव, संतोष भुवन, बिलालपाडा, नालासोपारा में ओस्तवाल नगरी और विरार में कारगिल नगर जैसे कई इलाके हैं, जहां पानी की बहुत ही किल्लत है। यहां वॉटर माफिया द्वारा धड़ल्ले से पानी बेचा जाता है। हालांकि मनपा का दावा है कि वो सूर्या डैम से रोजाना 140 एमएलडी पानी की सप्लाई कर रही है।

अंबरनाथ स्थित रेलवे डैम में भी वॉटर माफियाओं द्वारा पानी चोरी की घटनाएं रेलवे पुलिस स्टेशन में दर्ज हैं। टैंकर माफियाओं पर नकेल कसने के लिए रेलवे पुलिस बल के अलावा लोकल पुलिस और सीआईएसफ भी तैनात किए गए, लेकिन सूत्र बताते हैं कि आज भी वॉटर माफिया रेलवे के इस संपत्ति में सेंध लगाते रहते हैं, जबकि यहां से रेल नीर के लिए पानी सप्लाई की जाती है।

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