ठगने में माहिर हैं रोड छाप एजेंट

कबूतरबाजों से सावधान!

प्रहरी संवाददाता/ मुंबई। लखपति और करोड़पति बनने के चक्कर में इस दौर के बेरोजगार युवकों को कबूतरबाजों ने कहीं का नहीं छोड़ा, खाड़ी देशों में शानदार नौकरी दिलाने का सब्जबाग दिखा कर बेरोजगारों की दौलत पर खुद ऐश करते हैं। ऐसे क़बूतरबाजों के फंदे में देश के लाखों युवक अब भी कराह रहे हैं। जबकि सरकार ने विदेशों में नौकरी के इच्छुक लोगों के लिए संवैधानिक तरीके से ट्रेवल्स एजेंसियों को मान्यताएं दी हैं। इसके बावजूद जल्दी में करोड़पति बनने के चक्कर में नई पीढ़ी के युवक किसी न किसी तरह कबूतरबाजों के जाल में फंस ही जाते हैं।
गौरतलब है कि देश की रजिस्टर्ड ट्रेवल्स एजेंसियां ही विदेशों में नौकरी करने के इच्छुक लोगों को उनकी योग्यता और क्षमता वेत्र् अनुसार विदेशों में नौकरी दिला सकती हैं। लेकिन इन दिनों रजिस्टर्ड ट्रेवल्स एजेंसियों से अधिक मुंबई में रोड छाप एजेंट हैं जो बेरोजगारों को धड़ल्ले से चूना लगा रहे हैं।
बताया जाता है कि देश की मायानगरी मुंबई और राजधानी दिल्ली के अलावा बड़े शहरों में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त ट्रेवल्स एजेंसियां बाकायदा इस काम में लगी हैं। लेकिन देश के महानगरों के अलावा चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता सहित देश के सभी राज्यों में एजेंसियों से अधिक रोड छाप एजेंट हैं। जो बेरोजगार युवकों को सब्जबाग दिखाकर धड़ल्ले से लूट रहे हैं। ऐसे एक नहीं हजारों मामले मुंबई के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज हैं। इसके बावजूद मुंबई के लुटेरे रोड छाप एजेंट सक्रिय हैं। मुंबई के सक्रिय एजेंटों द्वारा कभी मेडिकल के नाम पर ठगी की जाती है तो कभी फर्जी वीजा दिखाकर देश के बेरोजगारों को लूटा जाता है। इस कड़ी में दिलचस्प बात यह है कि जल्द लखपति और करोड़पति बनने का जुनून लेकर आने वाले बेरोजगार किसी न किसी तरह रोड छाप एजेंटों का शिकार होते हैं। इस तरह देश में बढ़ती बेरोजगारी का जमकर फायदा यहां के कबूतरबाज उठा रहे हैं। जबकि खाड़ी देशों से लगातार भारतीय नौकरी पेशा लोगों को वापस भेजा जा रहा है। वहीं फर्जी वीजा का जेरॉक्स दिखाकर दूसरे राज्यों से नौकरी की तलाश में आए शिक्षित बेरोजगारों को रोड छाप दलालों द्वारा लूटने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
उल्लेखनीय है कि खाड़ी देशों में अच्छी नौकरी व अधिक वेतन पाने क़ी ललक में देश के लगभग हर राज्यों के बेरोजगार व शिक्षित युवक मुंबई जैसे शहरों में आते हैं। इनमें कोई अपनी जमीन बेच कर आता है, तो कोई घर या परिवार के लोगों जेवर बंधक रखता है, या फिर ब्याज पर रूपये लेकर मुंबई जैसे महंगे शहर की खाक छानता है। इस दौरान कुछ लोगों को सही ट्रेवल्स एजेंसियां मिल जाती हैं वो कामयाब हो जाते हैं। वहीं जो रोड छाप एजेंटों (कबूतरबाज) के चक्कर में फंसे उन्हें वो कहीं का नहीं छोड़ते।
ऐसे रोड छाप एजेंटों की संख्या कुर्ला, चेंबूर, वाशीनाका, शिवाजीनगर, सांताक्रुज, जोगेश्वरी, गोरेगांव, नवी मुंबई, माहिम और बांद्रा में तेजी से बढ़ती जा रही है। छानबीन से पता चला है कि रोड छाप एजेंट अपने बचाव के लिए रजिस्टर्ड ट्रेवल्स एजेंसियों से अपना पहचान पत्र बनवा लेते हैं। ताकि लोगों को ठगने में ज्यादा परेशानी न हो।

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