प्रहरी संवाददाता/ मुंबई। माहे मोहर्रम की चालीसवां के मौके पर शिया समुदाय द्वारा कुर्ला पूर्व के नेहरूनगर में भव्य मातमी जुलुस निकाला गया। ”दस्ते अबू तालिब’ ‘नामक संस्था के बैनर तले अजा व नोहा मातम की लंबी दौर चलती रही। इस जुलुस में मुंबई की विभिन्न कमिटियों के करीब डेढ़ से दो हजार लोग शामिल हुए। मातमी जुलूस में हर उम्र के लोगों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष चालीसवां के मौके पर मुंबई व उपनगरों के शिया समूदाय के लोगों ने कुर्ला पूर्व स्थित नेहरूनगर में भव्य जुलूस में अजा व नोहा मातम किया। ”दस्ते अबू तालिब” नामक संस्था के बैनर तले घंटों चले इस कार्यक्रम में नेहरूनगर पुलिस ने भरपूर सहयोग दिया।
इस आयोजन में समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने नोहा पढ़ते हुए मातम भी किया। यह जुलूस कुर्ला पूर्व स्थित नेहरूनगर के आदर्श चाल से होते हुए बेस्ट डिपो पर जा कर खत्म हुआ। प्राचीन काल से चल रही इस परंपरा को समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने अब भी बरकरार रखा है।
इस तरह का आयोजन हर साल चालीसवां के अवसर मुंबई के अलग-अलग स्थानों पर किया जाता है। इस आयोजन में महिला और पुरूषों के अलावा नन्हें मुन्ने बच्चों ने नोहा पढ़ा व मातम किया। बता दें कि इस परंपरा की शुरूआत समाज के चौथे इमाम से जुड़ी है। बताया जाता है कि हजरत इमाम जैनुल आबेदीन अलै. के गम में इस आयोजन को हर साल दोहराया जाता है।
इस कड़ी में दिलचस्प बात यह है कि जुलूस की शवल में निकला यह काफिला बेस्ट के डिपो पर समाप्त हो गया। इसके बाद मजलिस का आयोजन किया गया, मजलिस में हजारों की संख्या में समाज मजलिस रहनुमा व इसके मानने वालों ने दीन व इस्लाम की बातों से रूबरू हुए।
इस आयोजन में स्थानीय लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इनमें दस्ते अबू तालिब के अध्यक्ष खुर्शीद अंसारी ने बताया की इस पर्व का महत्व है। वहीं संस्था के सचिव सैय्यद रईस ने बताया कि इस आयोजन से हमें सुकून मिलता है।
जबकि इसके खजांची अजाद हुसैन मिर्जा (अज्जु मिर्जा) ने कहा कि समाज के लोग इस अवसर पर शरबत आदि पिलाते हैं। इस आयोजन को सफल बनाने में सैय्यद एजाज हुसैन,सैय्यद सरदार हुसैन, सैय्यद रिजवान, सैय्यद मोहम्मद आदि लोगों ने अहम भूमिका निभाई।
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