पुलिस को चकमा देते दो गुटखा तस्कर
प्रहरी संवाददाता/ मुंबई। वाशीनाका के दो गुटखा तस्करों ने चेंबूर सहित मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में अपना जोरदार नेटवर्क तैयार किया है। ताकि पुलिस को आसानी से चकमा दिया जा सके। धड़ल्ले से चल रहे गुटखों की सप्लाई के कारण महाराष्ट्र में प्रतिबंधित गुटखा नहीं बेचने वाले पान दुकानों के मावा की बिक्री पर खासा असर पड़ा है। जबकि राज्य में प्रतिबंधित गुटखों की तस्करी वाशीनाका से पूरे शबाब पर है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वाशीनाका के दो गुटखा तस्करों द्वारा गुजरात से गुटखा लाया जाता है। गुजरात के रास्ते आने वाले विभिन्न कंपनी कंपनियों के गुटखों को तस्करों द्वारा शहर के अन्य क्षेत्रों में सायकल, मोटरसायकल व बड़ा खेप रहा तो टेंपो के जरीये माल पहुंचाया जाता है।
बता दें कि पिछले दिनों आरसीएफ पुलिस ने पंकज नामक एक गुटखा तस्कर पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। उक्त मामले में पंकज को जेल भी जाना पड़ा, लेकिन छुटने के बाद वह फिर से प्रतिबंधित गुटखों की तस्करी में जुट गया है। सूत्रों की माने तो एक तरफ पंकज तो दूसरी तरफ विजय नामक गुटखा तस्करों द्वारा वाशीनाका के अलावा मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि वाशीनाका के चंद दुकानों को छोड़ कर अधिकांश पान-बीड़ी बेचने वाले दुकान व टपरियों पर गुटखा उपलब्ध रहता है। इस तरह वाशीनाका विभिन्न प्रकार के गुटखों का गढ़ बन गया है। जो कि महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है। बता दें कि आसानी से मिलने वाले गुटखे के कारण मावा खाने वाले भी अब गुटखा ही खाने लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि आसानी से गुटखा मिलने के कारण स्कूली छात्र भी इसके आदि होते जा रहे हैं। मजे की बात यह है कि वाशीनाका के पान बीड़ी व कुछ जनरल स्टोरों पर खुलेआम गुटखों की बिक्री होती है।
सूत्रों की माने तो गुजरात से आने वाला गुटखा, बलसाड के चोर रास्ते घोड़बंदर होते हुए देर रात लाया जाता है। गुटखा तस्करों की मजबूत सेटिंग होने के कारण कभी वाशी टोलनाका तो कभी ठाणे टोलनाका होकर लाया जाता है। इस कड़ी में मजेदार बात यह है कि शातिर गुटखा तस्करों द्वारा लगभग पूरी रात खत्म होने के बाद सुबह के समय टेम्पो वाशीनाका परिसर में घुसता है। ताकि जनता के साथ-साथ पुलिस को भी चकमा दिया जा सके।
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