4 माह में नहीं बना 100 मीटर की दीवार
मुश्ताक खान/ मुंबई। महज दो दिनों की मूसलाधार बारिश के दौरान मलाड के कुरार गांव स्थित जलाशय की 15 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। कुछ ऐसी ही स्थिति वाशीनाका (Vashinaka) के बड़े नाले पर बन रहे सुरक्षा दीवार का भी है। इसे देखते हुए स्थानीय लोगों ने मनपा से मांग की है कि मलाड की तरह यहां भी एक कमिटी बनाए, जिसमें आईआईटी (IIT) और वीरमाता जीजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान (Veermata Jijabai Institute of Technology) (वीजेआईटी) के विशेषज्ञ शामिल हों। ताकि दशकों से लंबित नाले की सुरक्षा दीवार सही तरीके से मजबूत बन सके।
गौरतलब है कि मलाड के जलाशय की सुरक्षा दीवार के ढह जाने से 26 लोगों की मौत हुई थी। इस दीवार का काम ओंकार इंजीनियर्स ऐंड कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा 21 करोड़ में किया गया था। जनकार बताते हैं कि ठेका कंपनी की लापरवाही, समाग्रह में मिलावट और बिना पीलर के बने दीवार के ढहने का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि मनपा ने इसके लिए एक कमिटी का गठन किया है, जिसमें आईआईटी और वीरमाता जीजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान (वीजेआईटी) के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
चेंबूर (Chembur) के आरसी मार्ग (R C Marg) पर स्थित वाशिनाका (Vashinaka) के इस्लामपुरा (Islampura) व शरदनगर (Sharad Nagar) बीच से बन रहे बड़े नाले के किनारे की सुरक्षा दीवार बनाने काम कोर्नाक इंजीनियरिंग को दिया गया है। इस नाले की सुरक्षा दीवार को बनाने में अड़चन बनी शरदनगर के कई झोपड़ों को मनपा के अधिकारियों ने 28 फरवरी 2019 को भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच तोड़ दिया। इसके बाद दोनों नगरों के नागरीकों द्वारा ठेकेदार को हर तरह की सहयोग किया।
ताकि बारिश से पहले नाला के किनारे बन रहे सुरक्षा दीवार तैयार हो सके। लेकिन कोर्नाक इंजीनियरिंग के सुस्त रवैये और कर्मचारियों की ढिलाई व लापरवाहियों के कारण अभी तक सुरक्षा दीवार का काम अधर में लटका है। जानकर बताते है कि भारी भरकम सुरक्षा दीवार का फाउंडेशन नियमों से हटकर बनाया गया है। जो कभी भी धाराशाई हो सकता है। स्थानीय नागरीकों द्वारा बेवजह सुरक्षा दीवार बनाने में देरी की वजह जानने के लिए कोर्नाक इंजीनियरिंग के सुपरवाईजर अमित और साईट इंजीनियर अभिषेक तिवारी से कंपनी के मैनेजर या मालिकों का पता या मोबाईल नंबर मांगने पर दोनों ने अपना पल्ला झाड़ लिया।
इन दोनों ने कंपनी का पता या संपर्क नंबर देने से इंकार कर दिया। इसके बाद एसडब्लूडी के अभियंता ओम् चव्हाण से संपर्क किया गया, लेकिन मीटिंग में होने के कारण बात न हो सकी। उल्लेखनीय है कि मनपा के ठेकेदारों की लूट खसोट के कारण नदी नालों की सुरक्षा दीवार समय से पहले ताश के पत्तो की तरह ढह जाती है। इसका खामियाजा मुंबईकरों को अपनी जान माल गांव कर चुकाना पड़ता है। जैसा कि मलाड के कुरार गांव स्थित जलाशय का हुआ है।
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