मुंबई। राज्य के निजी स्कूलों को मिलने वाली सस्ती बिजली अब नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार के ऊर्जा विभाग ने इस बारे में आदेश जारी किया है। जानकारी के अनुसार, राज्य के निजी स्कूलों को सामाजिक दृष्टिकोण से बिजली के बिल में 9% विद्युत शुल्क माफी दी जाती थी, लेकिन निजी स्कूलों द्वारा की जा रही नफाखोरी के बाद राज्य सरकार ने यह रियायत रद्द करने का फैसला लिया है।
महाराष्ट्र राज्य विद्युत शुल्क अधिनियम 1958 प्रावधान के तहत सार्वजनिक न्यास अधिनियम 1950 के तहत पंजीकृत निजी स्कूलों को विद्युत शुल्क में यह रियायत दी जा रही थी। अब यह अधिनियम रद्द कर दिया गया है। इसके स्थान पर महाराष्ट्र विद्युत शुल्क अधिनियम 2016 लागू किया गया है।
इस अधिनियम के तहत स्थानीय निकायों अर्थात नगर पालिका, महानगरपालिका, जिला परिषद आदि द्वारा संचालित स्कूलों को ही विद्युत शुल्क में माफी दी जाएगी। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ सालों में राज्य में बड़े पैमाने पर निजी स्कूल खुले हैं। इनमें से अनेक स्कूल अंतरराष्ट्रीय स्तर के नाम पर और अन्य सुविधाओं के नाम पर मोटी फीस वसूल रहे हैं।
इन स्कूलों में प्रवेश के लिए विद्यार्थी और उनके पालकों से अलग-अलग मद में फीस के साथ भारी भरकम राशि ली जाती है। इसके बावजूद निजी स्कूल विद्युत शुल्क में माफी की मांग करते हैं, इससे सरकार को सालाना लाखों रुपये का आर्थिक बोझ सहन करना पड़ता है।
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