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भगवान में जैसी श्रद्धा वैसा ही परिणाम : प्रेम भूषण महाराज

राकेश दुबे/ मुंबई। परम पूज्य प्रेममूर्ति संत श्री प्रेमभूषण जी महाराज ने नालासोपारा के स्वस्तिक मैदान में श्री रामकथा के आखिरी दिन कहा कि भगवान में जैसी हमारी श्रद्धा होगी, हमारे जीवन में परिणाम भी उसी तरह प्राप्त होगा। महाराज जी के जीवन की प्रथम स्वर्णान्जली कथा को मानस परिवार सेवा समिति- मुम्बई के तत्वाधान में 22 से 30 दिसंबर 2018 तक नित्य सायं 4 से 7 बजे तक बिजेंद्र सिंह स्वर्णान्जली मानस- महोत्सव के रूप में आगोजित कराया गया। कथा का शुभारंभ शोभायात्रा के बाद दीप प्रज्वलित कर किया गया।

पूज्यश्री ने मानस को परंपराओं का ग्रंथ बतलाते हुए कहा कि मानस अर्पण, समर्पण, त्याग और परमार्थ का महाग्रंथ है, समाज को संदेश दिया कि भागवत परंपरा से परिपूर्ण परिवार धन्य है, परंपराओं का पालन न करने वालों का पतन सुनिश्चित होता है। मनुष्य को असामान्य जीवन जीने के लिए असामान्य तप करना पड़ता है। पूज्यश्री ने शंकर को परिभाषित करते हुए कहा कि जानते हुए भी जो महाविष का पान कर ले वही शंकर है, महादेव है और वही शांत रह सकता है।

पूज्यश्री ने सुख और दुःख को जीव की मनःस्थिति का परिणाम बतलाते हुए कहा कि हमे सदैव प्रसन्नता में विचरण करना चाहिये। पूज्यश्री ने कहा कि रामकथा का प्रारंभ घर से न होकर वन से हुआ और ऐसी विषम परिस्थिति से लड़ते, उसे पराजित करने के बाद भी परंपरा के सिद्धांत को स्मरण रखना ही रघुवंश को श्रेष्ठत्व प्रदान करता है, अपने समस्त विकारों को प्रभु चरणों में अर्पित कर देने से जीव शांत रहता है। कथा के आखिरी दिन कृपाशंकर सिंह, उनकी पत्नी मालती सिंह, सुरेंद्र मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार राकेश दुबे, संपादक महेश शर्मा, शारदाप्रसाद तिवारी, भानुप्रताप सिंह, दिनेश सिंह समस्त हजारों की संख्या में राम भक्तों ने कथा श्रवण का लाभ लिया।

इससे पूर्व में कथा श्रवण का लाभ लेमे वालों में रूपेश नाईक- महापौर-वसई -विरार महानगर पालिका, मानस परिवार सेवा समिति मुम्बई -प्रधान गणेश अग्रवाल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख -अमेठी राजेश सिंह, रामनारायण दुबे, सहयोगी संस्था नैसर्गिक विकलांग सेवासंघ-अध्यक्ष टी. एन. दुबे, आयोजक बिजेंद्र सिंह, नगरसेवक मनोज दुबे, राजेन्द्र सिंह ठाकुर, दीपक सिंह, बंशराज सिंह, बंटी सिंह, भूपेंद्र सिंह, महिला सभापति श्रीमती सरिता पी. दुबे, सुनील सिंह, रेखा गुप्ता, एडवोकेट सुरेन्द्र त्रिपाठी, दिनेश तिवारी, श्रीमती जयश्री अग्रवाल, अरुण मिश्रा आदि प्रमुख थे।

 


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