साभार/ मुंबई। महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार के राज में आदिवासी विभाग में 70 करोड़ रुपये के फर्नीचर खरीदी घोटाले का आरोप विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। सोमवार को वडेट्टीवार पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य के 502 आश्रमशालाओं में 2 लाख छात्रों और होस्टल में रहने वाले 58,000 छात्रों के लिए फर्नीचर खरीदने हेतु टेंडर मंगाए गए थे।
फर्नीचर के रूप में लोहे का बेड, कुर्सी, टेबल जैसी चीजें खरीदी जानी थीं। अमरावती, नागपुर, ठाणे और नासिक विभाग के लिए 345 करोड़ का टेंडर मंगाया था। अमरावती और नागपुर विभाग के लिए स्पेसवुड कंपनी और नासिक-ठाणे विभाग के लिए गोदरेज कंपनी को काम दिया गया। अमरावती और नागपुर विभाग के लिए स्पेसवुड कंपनी ने जिस क्वॉलिटी का सामान जिस दर में दिया उसी क्वॉलिटी के सामान के लिए गोदरेज कंपनी ने दोगुनी कीमत वसूली है।
टेंडर नियमों के तहत सबसे कम कीमत कोट करने वाली कंपनी का टेंडर ही स्वीकार किया जाना चाहिए। स्पेसवुड की अपेक्षा दोगुनी कीमत बताने वाली कंपनी को आपूर्ति का ठेका क्यों दिया गया, इतना अंतर क्यों ?
वडेट्टीवार का कहना है कि अमरावती विभाग में स्पेसवुड कंपनी ने लोहे के बेड की दर 5,734 रुपये बोली लगाई है तो गोदरेज कंपनी के उसी बेड के लिए 11,000 रुपये मांगे। इसी तरह अमरावती के लिए स्पेसवुड कंपनी ने एक कुर्सी के लिए 2,678 रुपये, पर गोदरेज कंपनी ने नासिक के लिए प्रति कुर्सी 6,000 रुपये कोट किया है। अमरावती-नागपुर की अपेक्षा नासिक व ठाणे में 75 से 100 फीसदी अधिक कीमत में फर्नीचर खरीदे गए हैं। वडेट्टीवार ने गोदरेज कंपनी को दिया गया ठेका रद्द कर मामले की जांच कराने की मांग की है।
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