नेताओं पर भारी पड़ सकता है ‘नोटा’ बटन


मुंबई। नोटा (नन ऑफ द ऐबव) यानि कोई उम्मीदवार पसंद नहीं है। चुनाव आयोग का यह नियम नेताओं पर अब भारी पड़ सकता है। महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके अनुसार जिस मतदान क्षेत्र में विजेता उम्मीदवार से ज्यादा वोट नोटा को मिलेंगे, वहां फिर से मतदान कराया जाएगा।

महाराष्ट्र में कई सारे पंचायत क्षेत्रों में हाल में ही चुनाव कराए गए। करीब 200 जगहों पर कराए गए मतदान में 80 फीसदी से ज्यादा वोट नोटा को मिले। आयोग ने मजबूर होकर नोटा से पिछड़ने वाले दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को विजेता घोषित किया। ऐसे में चुनाव आयोग के ही नहीं, बल्कि आम आदमी के जेहन में प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलने पर दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को कैसे विजेता घोषित किया जा सकता है?

एक ग्राम पंचायत में कुल 1,179 वोट पड़े, जिनमें से नोटा को 950 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे विजेता उम्मीदवार को सिर्फ 170 वोट ही मिले, फिर भी वह विजेता घोषित किया गया और सरपंच बन गया। इसी साल पालघर जिले के दाभाडी ग्राम पंचायत चुनाव में चार उम्मीदवारों में से किसी भी उम्मीदवार को 100 वोट भी नहीं मिले, जबकि 632 वोट नोटा को मिले।

भारत निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में नोटा बटन का विकल्प उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। यह विकल्प अब न्याय मांग रहा है। विजेता उम्मीदवार से ज्यादा वोट नोटा को मिल रहे हैं। इस बारे में चुनाव आयोग के अधिकारी खुद कहते हैं कि यह लोकतंत्र का मजाक नहीं है तो क्या है? आयोग के अधिकारी का कहना है कि उन्होंने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके अनुसार नोटा को ज्यादा वोट मिलने की स्थिति में वहां फिर से मतदान कराया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लिया और नियमों में बदलाव के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। अब इसे केंद्रीय चुनाव आयोग के पास भेजा गया है।

देश के अन्य राज्यों में भी नोटा पर मुहर लगाने वाले मतदाताओं की तादाद बढ़ी है। साल 2014 से 2017 के बीच बिहार में 9.47, पश्चिम बंगाल 8.31, उत्तर प्रदेश 7.57, मध्य प्रदेश 6.43, राजस्थान 5.89, तमिलनाडु 5.62, गुजरात- 5.51, छत्तीसगढ़ 4.01, आंध्र प्रदेश 3.08, मिजोरम 0.38. प्रतिशत वोट पड़े। महाराष्ट्र में 4.83 प्रतिशत वोट नोटा को मिले हैं। अभी पिछले महीने ही विधान परिषद की शिक्षक व स्नातक सीटों के लिए हुए चुनाव में भी मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। कोकण स्नातक सीट पर 336 मतदाताओं ने नोटा, जबकि नासिक शिक्षक सीट पर 103 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।

 


 309 total views,  1 views today

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *