फर्जी डॉक्टरों पर नहीं हो रही कार्रवाई

साभार/ मुंबई। प्रशासन जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा 58 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने से ही लगाया जा सकता है। पिछले साल फर्जी डिग्री के मामले में 58 डॉक्टरों को न केवल महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) द्वारा सस्पेंड किया गया था, बल्कि इनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज कराए गए थे, बावजूद इसके इसमें से ज्यादातर डॉक्टर अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और प्रैक्टिस कर रहें हैं। यह खुलासा एक आरटीआई के तहत मांगे गए जवाब में हुआ है।

आरटीआई कार्यकर्ता अजय बी. बोस ने कहा कि ‘फर्जी डॉक्टरों को लेकर पिछले साल एमएमसी में एक आरटीआई फाइल की थी। अक्टूबर में आए जवाब के अनुसार, 58 डॉक्टरों द्वारा फर्जी डिग्री लेकर प्रैक्टिस की जा रही थी, हालांकि कार्रवाई की जानकारी हमें उस वक्त नहीं मिली। हाल ही में जब फिर से इस बारे में जानकारी निकाली तो एमएमसी से मिले जवाब के अनुसार, पिछले साल 19 अक्टूबर को इन डॉक्टरों के खिलाफ आग्रीपाडा पुलिस स्टेशन में आपराधिक मामले दर्ज कराए गए थे, हालांकि अभी भी ज्यादातर डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं। मामले के 3 महीने बाद भी डॉक्टरों को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। यह डॉक्टर राज्य के अलावा दूसरे राज्यों में भी प्रैक्टिस कर रहे हैं और आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।’ बता दें कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक वकील ने इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर तत्काल रूप से डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग की है।

इस बारे में आग्रीपाडा पुलिस स्टेशन के सीनियर पी.आई. एस. आगवणे ने बताया कि ‘मामले की जांच चल रही है। अब तक दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। हमें जानकारी मिली है कि कुछ और फर्जी डॉक्टरों के नाम इसमें शामिल हैं। इसकी लिस्ट हमें एमएमसी मिलने वाली है, जिसके बाद डॉक्टरों की गिरफ्तारी शुरू होगी।’ इस फर्जीवाड़े में कई लोगों के नाम हो सकते हैं, जिसमें डॉक्टर के अलावा कॉलेज से जुड़े लोग भी शामिल हैं। एमएमसी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ मामला पुलिस में दर्ज है, इनकी गिरफ्तारी और इन पर कार्रवाई के लिए अब पुलिस जवाबदेह है। यह मामला सामने आने के बाद हम पीछे के भी मामलों की जांच कर रहे हैं, जिसमें और भी फर्जी डॉक्टरों के नाम सामने आ सकते हैं।

महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष शिवकुमार उतुरे ने कहा कि, फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है। एमएमसी ने पहले ही इनका लाइसेंस निरस्त कर दिया है। हमें इनके प्रैक्टिस करने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं आरटीआई कार्यकर्ता अजय बी बोस का कहना है कि, आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर ये डॉक्टर कई मरीजों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। इन पर जल्द से जल्द कार्रवाई होनी चाहिए।

बता दें कि, आग्रीपाडा पुलिस ने अक्टूबर 2018 में डॉक्टरों की पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री फर्जी होने की एफआईआर दर्ज कर ली थी। तीन महीने तक भी पुलिस को इतने संवेदनशील मामले में कार्रवाई करने की मोहलत नहीं मिली। ये डॉक्टर खुद को स्पेशलिस्ट बताकर लोगों का अब भी इलाज कर रहे हैं। यह शर्मनाक तो है ही, मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ भी है। अब भी देर नहीं हुई है, इन फर्जी डॉक्टरों को हिरासत में लेकर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

 


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