मुंबई। मुंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड से कहा है कि उसने मेट्रो तीन के कारण जिन पेड़-पौधों को काटकर नए पेड़-पौधे लगाए हैं उनकी सही देखभाल करे, ताकि वे बराबर पनप सकें। इस मेट्रो के कारण हजारों पेड़-पौधों पर आरी-कुल्हाडी चली है। मुंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल जून में दो वरिष्ठ जजों की एक समिति गठित की थी, जिसमें न्यायाधीश एसएम खेमकर और न्यायाधीश बीआर गवई थे और उसने इस रेल लाइन के कारण कटे पेड़-पौधों संबंधी शिकायतों पर गौर करने का काम अपने हाथ में लिया था।
इस 33 किलोमीटर लंबी कोलाबा-बांद्रा-सीप्ज के बीच बनने वाली इस मेट्रो ट्रेन के कारण 5000 पेड़-पौधों के कटने की आशंका है। इस समिति को इस संबंध में दायर करने वाली याचिका दायर करने वालों ने बताया कि इस साल जून तक 800 पेड़ों को काटा जा चुका है और इनकी जगह जो पेड़ लगाए गए हैं, उनमें से 583 पेड़ों के जिंदा रहने का कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहा है।
समिति ने मुंबई मेट्रो से पूछा है कि वह इस परियोजना के कारण काटे जा रहे पेड़-पौधों की जगह नए पेड़-पौधे लगाने और उनकी साज-संभाल के लिए क्या उपाय कर रही है। समिति ने कहा कि इस संबंध में जरूरत पड़ने पर वह विशेषज्ञों और जानकारों की सहायता ले सकती है। ‘हर पेड़ को बचाने की कोशिश करनी चाहिए’।
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