मुकुंदनगर के बेहाल नागरिकों की फरियाद

लोगों ने लगाई मनपा आयुक्त से न्याय की गुहार

संवाददाता/ मुंबई। महानगर मुंबई के विभिन्न स्थानों के परियोजना प्रभावितों को वाशीनाका स्थित मुकुंदनगर (Mukund Nagar) की अव्यवस्थित जर्जर इमारतों में मनपा द्वारा जबरन शिफ्ट कराया जा रहा है। करीब डेढ़ दशक पूर्व बनी लगभग 13 इमारते खंडहर हो चुकी थीं। फिलहाल इन इमारतों को मनपा ने मरम्मति के लिए M/s Umit Corporation (उमित कॉर्पोरेशन) नामक ठेका कंपनी को दिया है। इन इमारतों के दुरूस्तीकरण में करीब एक साल और लगने वाला है। इन इमारतों का अभी तक ऑडिट भी नहीं हुआ है। लेकिन आधे-अधूरे मरम्मत हुए इन इमारतों में जबरन प्रभावितों को भेजा जा रहा है। एसे में कोई घटना होने पर जिम्मेदार कौन होगा?

मिली जानकारी के अनुसार मनपा के विभिन्न वार्डो के परियोजना प्रभावितों को करीब दो सप्ताह से लगातार वाशीनाका स्थित मुकुंदनगर में पुनर्वसन कराया जा रहा है। इन इमारतों में कहीं पानी, बिजली तो कहीं फ्लैटों से जुड़ी अन्य समस्याएं हैं। इसके बावजूद मनपा के अधिकारियों द्वारा जबरन परियोजना प्रभावितों को यहां शिफ्ट कराया जा रहा है। इससे यहां आने वालों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। बता दें कि इन इमारतों का ऑडिट भी नहीं हुआ है। इसके बाद भी यहां मनपा के अधिकारियों द्वारा यह भी कहा जा रहा है की मुकुंदनगर की इमारतें बेहतर और मजबूत हैं। जबकि मामूली खिल्ला मारने पर इन इमारतों के प्लास्टर झड़ने लगते हैं।

चूंकि जर्जर हो चुकी इन इमारतों के मरम्मति का काम अभी अधूरा ही है। स्थानीय लोगों का कहाना है की ऐसे में शिकायत करने पर ठेकेदार के सुपरवाईजर व उसके पार्टनर का कहना है की अभी मेरा काम पूरा नहीं हुआ है। कभी कभी ठेका कंपनी के कर्मचारी शिफ्टिंग में आए लोगों को यह कह कर टाल देते हैं की उक्त काम का ठेका मैने नहीं लिया है। महानगर मुंबई के विभिन्न परियोजनाओं के प्रभावितों ने मनपा आयुक्त प्रवीण परदेसी से न्याय की गुहार लगाई है।

मुकुंदनगर के रहिवासियों की मांग है की मनपा आयुक्त अपने कीमती समय में से कुछ समय निकाल कर परियोजना प्रभावितों की समस्याओं को देख लें अथवा अपने निजी सूत्रों से यहां की जानकारी लेकर उचित न्याय करें। मुकुंदनगर में शिफ्ट हुए लोगों का कहना है की पात्र होने के बाद भी मनपा के विभिन्न वार्डो के मेंटेनेंस विभाग द्वारा अचानक तोड़क कार्रवाई करने का निर्देश देकर एक या दो दिनों में जबरन शिफ्ट कराया जा रहा है। इतने कम समय में लोग कुछ भी नहीं कर पाते वहीं मनपा के अधिकारी शिफ्टिंग का आदेश देने के बाद आपस में बैठ कर लोगों की परेशानियों पर हंसते देखे जा रहे हैं। मनपा द्वारा अब तक मोरलैंड रोड (Morland Road), भायखला (Byculla), वाशीनाका (Vashinaka) व अन्य स्थानों से जबरन भेजे गए लोगों के बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

गौरतलब है की वाशीनाका स्थित मुकुंदनगर में बेतरतीब बनी जर्जर इमारतों की मरम्मति के नाम पर सिर्फ पेंटिंग कर चमकाया गया है। बिना ऑडिट और बिना वेरिफिकेशन किये शहर के विभिन्न इलाके के परियोजना प्रभावितों को जबरन मनपा के अधिकारी अपने पद का लाभ उठाकर यहां भेज रहे हैं। जो कि यहां के नागरिकों के साथ नाइंसाफी है। मुकुंदनगर की जर्जर हो चुकी इन इमारतों की दीवारें पूरी तरह खोखली हैं की मामूली खिले का बोझ भी नही उठा पाती। इसके अलावा इन इमारतों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी लगता था। ठेका कंपनी और मनपा के अधिकारियों की मिलीभगत होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। इस लिहाज से मुकुंदनगर की इमारतों की मरम्मति कर रही उमित कॉर्पोरेशन की भी जांच होनी चाहिए।

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