मुंबई। राज ठाकरे को कभी महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऐंग्री यंग मैन’ के रूप में जाना जाता था, अब उनकी धमक कम हो रही है। कभी किंग मेकर और राजनीति का खेल बिगाड़ने के लिए पहचाने जाने वाले राज अब खुद कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में एक सीट पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बीते दो महीनों में राज ठाकरे एनसीपी चीफ शरद पवार और उनके भांजे अजित पवार से गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए मुलाकात कर चुके हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पहले मुंबई नॉर्थ ईस्ट सीट से लड़ने की इच्छुक थी लेकिन अब वह कल्याण की सीट से भी समझौता करने को तैयार हैं। हालांकि अभी इस सीट पर भी फैसला होना बाकी है। कांग्रेस गठबंधन में राज ठाकरे की ऐंट्री का विरोध कर रही है।
बता दें की एमएनएस के एकलौते विधायक शरद सोनावाने सोमवार को शिवसेना में अपने समर्थकों के साथ वापस आ गए। पुणे जिले की जुन्नार सीट से विधायक सोनावाने 2014 के विधानसभा चुनाव में एमएनएस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले एकमात्र प्रत्याशी थे। शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे ने उनका पार्टी में स्वागत किया है।
सोनावाने ने इस सीट पर शिवसेना की आशाताई को लगभग 17,000 सीटों से हराया था। उन्होंने नौ साल पहले शिवसेना जॉइन की थी तब उन्हें पार्टी में उपाध्यक्ष बनाया गया था। कुछ पार्टी के नेताओं और सांसद से मतभेद के बाद उन्हें बीते विधानसभा चुनाव में टिकट देने से इनकार कर दिया गया था जिसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले वह एमएनएस में शामिल हो गए थे।
वहीं एमएनएस ने कहा कि सोनावाने के जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पार्टी के प्रवक्ता संदीप देशपांडे ने कहा, ‘वह पार्टी के लिए किसी काम के नहीं थे। 4.5 साल जब वह एमएनएस में थे उन्होंने सिर्फ सीएम का झंडा उठाया, पार्टी के लिए कुछ नहीं किया इसलिए उनका पार्टी छोड़कर जाना किसी भी तरह से पार्टी को प्रभावित नहीं करेगा। जब वह यहां थे तभी पार्टी के लिए अच्छे नहीं थे।’
महाराष्ट्र की राजनीति में मनसे की उपस्थिति में तेजी से गिरावट आई है। पार्टी के 2009 में जहां 13 विधायक थे वहीं 2014 में सोनावाने एकलौते विधायक चुने गए। यहां तक कि 2017 में बीएमसी के सात पार्षदों ने भी राज ठाकरे का साथ छोड़कर उद्धव का दामन थाम लिया था।
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