महायुति के उम्मीदवार की बल्ले-बल्ले
मुंबई। दक्षिण- मध्य मुंबई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में चौथे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होने जा रहा है। इसे देखते हुए सभी दलों के उम्मीदवार और नेताओं द्वारा मतदाताओं को रिझाने का हर संभव प्रयास किय जा रहा है। करीब 15 लाख मतदाताओं वाले इस सीट से कुल 17 उम्मीदवार चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। लेकिन यहां भाजपा -शिवसेना महायुति और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महागठबंधन में सीधी टक्कर होने की संभावना है। क्योंकि अब तक यहां के मतदाता स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा ठगे गए, इस लिहाज से 17वीं लोकसभा चुनाव में यहां के मतदाता ठोक -बजा कर ही मतदान करेंगे।
खबर के मुताबिक करीब 15 लाख मतदाताओं वाले दक्षिण- मध्य मुंबई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में दलित और मुस्लिम मतदाता ही निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। गौरतलब है कि चेंबूर, अणुशक्तिनगर, मानखुर्द-शिवाजीनगर, सायन-कोलीवाड़ा, वडाला, धारावी और माहिम विधानसभा क्षेत्र में महायुति के उम्मीदवार राहुल शेवाले का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। क्योंकि शेवाले ने अपने कार्यकाल के दौरान क्षेत्र सहित मुंबई के विकास में अनोखे योगदान किये हैं।
नगरसेवक रहे राहुल शेवाले मनपा के स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष पद की गरीमा को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके बाद नगरसेवक राहुल शेवाले ने लोकसभा चुनाव लड़ा और एकनाथ महादेव गायकवाड को करीब डेढ़ लाख मतों से पठखनी दी थी। 2014 को लोकसभा चुनाव में निर्दलिय सहित कुल 21 उम्मीदवार चुनावी समर में कूदे थे। इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल 17 उम्मीदवार दक्षिण- मध्य मुंबई लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। इनमें महायुति और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महागठबंधन में सीधा टक्कर होने संभावना है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड को उनके ही दल के लोग हराने की फिराक में हैं। बताया जाता है कि चेंबूर विधानसभा क्षेत्र में दलित और मुस्लिम मतदाता ही निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद यहां के स्थानीय नेताओं द्वारा मुस्लिम मतदाताओं को भड़काया जा रहा है।
मुस्लिम मतदाताओं को यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा- शिवसेना तुम्हारी दुशमन है इस लिए तुम्हे कांग्रेस को ही वोट देना होगा। इसके अलावा अन्य कई ऐसी बातें सामने आई हैं जो दलित व मुस्लिम मतदाताओं को भड़काने के लिए काफी है। बता दें कि अब मतदान के लिए महज चार दिन और प्रचार के लिए दो दिन ही बचे हैं। ऐसे में मतदाताओं को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाले कांग्रेसी नेताओं का यही हाल रहा तो गायकवाड़ की हार तय है।
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