पूनम और प्रिया ने नहीं किया विकास
मुश्ताक खान/ मुंबई। पिता के स्वर्गावास के बाद जनता की सहानुभुति से सांसद बनी प्रिया दत्त और पूनम महाजन ने कुर्ला पूर्व परिसर में कोई ऐसा विकास का काम नहीं किया, जिसे वह इस बार के लोकसभा चुनाव में भुना सकें। उत्तर मध्य मुंबई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रहीं प्रिया दत्त और पूनम महाजन फिर इस बार के चुनावी मैदान में हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार जीतने के बाद दोनों में से किसी ने भी जनता की सुध नहीं ली। इतना ही नहीं सांसद रही प्रिया दत्त और पूनम महाजन लोगों का फोन कॉल भी नहीं उठातीं। ऐसे में सवाल उठता है कि इस बार के चुनाव में जनता को कौन सी रेवड़ियां बांटने वाली हैं ?
खबर के मुताबिक लगभग एक दशक से विकास की राह देख रही उत्तर मध्य मुंबई लोकसभा क्षेत्र कि जनता अब भी सरकारी सुविधाओं से वंचित है। इसकी खास वजह इस क्षेत्र के सांसदों का निकम्मापन और लापरवाही को माना जा रहा है। इसका जिम्मेदार मौजूद चुनावी मैदान में उतरी दोनों पूर्व सांसद प्रिया दत्त और पूनम महाजन ही हैं।
विकास के मुद्दे पर संवाददाता द्वारा कुर्ला पूर्व के कसाईवाडा, कुरैशनगर, ठक्करबप्पा कालोनी, वत्सलाताई नाईक नगर, राजीव गांधी नगर, वर्षा आदर्श नगर, हनुमान नगर, साबले नगर आदि इलाकों का दौरा किया। विकास के मुद्दे पर उपरोक्त नगरों के करीब 376 लोगों से चर्चा की। संवाददाता के सर्वेक्षण में कुछ पार्टी भक्तों को छोड़कर 67 फीसदी जनता इन दोनों पूर्व सांसदों से नाराज हैं। क्योंकि पूर्व सांसद प्रिया दत्त और पूनम महाजन ने 2014 के चुनाव में बड़े बड़े वादे किये थे। लेकिन जितने के बाद लगभग दोनों ही लापता हो गई।
कैसे करेंगी मतदाताओं का सामना
बता दें कि अपने कार्यकाल के दौरान भाजपा की पूर्व सांसद पूनम महाजन ने कुर्ला पूर्व परिसर में विकास के नाम पर कुछ भी ऐसा नहीं किया जिसे वो चुनाव प्रचार का मुद्दा बना सकें। कुछ ऐसी ही स्थिति कांग्रेस कि पूर्व सांसद प्रिया दत्त की भी है। हवा में तीर चलाना तो सभी को आता है लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। ऐसे में देश की दोनों बड़ी पार्टियों ने 17वीं लोकसभा चुनाव में उन्हें उतारा है।
गौरतलब है कि पूर्व सांसद पूनम महाजन को उनके पिता स्वर्गीय प्रमोद महाजन द्वारा पार्टी के लिए किए कार्यों को देखते हुए भाजपा ने सहानुभुती दिखाते हुए टिकट दिया है। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी लहर से पूनम महाजन भारी मतो से जीत गई। स्थानीय जनता के अनुसार इन्होंने विकास के नाम पर कुछ ज्यादा नहीं किया है।
वहीं अभिनेता से नेता बने सुनील दत्त के स्वर्गावास के बाद पिता कि सहानुभुति मिलने के कारण 2009 के लोकसभा चुनाव में उनकी बेटी पूर्व सांसद प्रिया दत्त को आम व खास मतदाताओं ने बहुमत दिया था। पूर्व सांसद प्रिया दत्त भी चुनाव जीतने के बाद लापता हो गई थी। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि गाहे बगाहे वो कुर्ला पूर्व में स्थित अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता से मिलती थी। कुल मिलाकर पूनम महाजन और प्रिया दत्त अपने कार्यकाल के दौरान अपने गिने चुने लोगों से ही मिलती या उनके निजी कार्यों को करती रहीं हैं। लेकिन अब चुनाव आ गया है और दोनो ही चुनावी मैदान में हैं।
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