रास्ता नहीं बना तो 2019 के चुनाव का होगा बहिष्कार
मुंबई। करीब सवा सौ साल पुरानी मुस्लिम कब्रिस्तान (Muslim Kabristan) में मय्यत ले जाने के लिए रास्ता नहीं है। जिसके कारण इस इलाके में होने वाली मय्यत को कुर्ला रेलवे स्टेशन के पादचारी पुल ((Kurla Railway Station Footover bridge) और प्लेटर्फाम से होकर कब्रिस्तान (Graveyard) जाना पड़ता है। इससे यहां के स्थानीय लोगों में रोष है। यहां के लोगों का कहना है कि सरकारें आती रहीं और जाती रही, लेकिन किसी ने इसकी सुध न ली। जबकि हर बार चुनाव के दौरान लगभग सभी राजनीति दलों ने कब्रिस्तान के लिए रास्ता व सौदर्यकरण का वादा करते रहे हैं। अब यहां के स्थानीय लोग 2019 के चुनाव का बहिष्कार करने के मूड में हैं।
खबर के अनुसार सबका साथ सबका विकास का राग अलापने वाली भाजपा सरकार भी कब्रिस्तान के रास्ते के मुद्दे पर मौन है। कुर्ला पूर्व व पश्चिम के लिए कसाईवाडा के इकलौते कब्रिस्तान (Kasaiwada Graveyard) में मय्यत को ले जाने के लिए रास्ता नहीं होने के कारण लोगों को कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। जबकि हर इंसान कि आखरी मंजिल कब्रिस्तान या शमशान ही है। बहरहाल कब्रिस्तान आने जाने के लिए रास्ते की मांग दशकों से की जा रही है।
इस बीच कई बार युति और आघाड़ी सरकारें आई और चली गई, लेकिन कब्रिस्तान का रास्ता आज तक नहीं बन पाया। इन सरकारों के लिए अब तक इस इलाके से दर्जनों सांसद, विधायक और नगरसेवक भी चुनकर आए, लेकिन सभी कसाईवाडा के कब्रिस्तान का रास्ता बनवाने में नाकाम रहे। हालांकि शिवसेना के पूर्व सांसद व लोकसभा के अध्यक्ष मनोहर जोशी (सर) ने अपने कार्यकाल में डंके की चोट पर कहा था की कुर्ला के कसाईवाडा (कुरैशनगर) में स्थित कब्रिस्तान के लिए विशेष डीपी तैयार कर रास्ता बनाया जाएगा। उस चुनाव में जीतने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
मौजूदा समय में यहां शिवसेना के विधायक मंगेश कुडालकर (Shivsena MLA Mangesh Kudalkar) और भाजपा सांसद पूनम महाजन (MP Poonam Mahajan) हैं। यहां के लोगों का आरोप है कि मुस्लिम बहूल क्षेत्र होने के कारण मौजूदा युति सरकार भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रही है। वहीं कुछ लोगों का आरोप है कि स्थानीय विधायक म्हाडा की पुरानी कॉलोनियों का पुनर्वसन कराने के लिए जैसे काम कर रहे हैं, अगर वो कब्रिस्तान के रास्ते के लिए कोई ठोस कदम उठाते तो यह असंभव नहीं था। चूंकि मौजूदा गृह निर्माण राज्य मंत्री शिवसेना के रविंद्र वायकर हैं। इन सभी उतार -चढ़ाव को देखते हुए यहां की जनता में सरकार के प्रति आक्रोश है और लोग आगामी 2019 के चुनाव का बहिष्कार करने के मूड में हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में हाजी इब्राहिम रहमान तांबोली का निधन हो गया, वे 111 वर्ष के थे। उन्होंने अपने पीछे हंसता खेलता कुंबा छोड़ा है। हाजी साहब की चार बेटियां व एक बेटा है। रविवार 28 अप्रैल को हाजी इब्राहिम रहमान तांबोली के निधन की जानकारी मिलने पर अपने बेगानों के अलावा पूरे क्षेत्र के लोग उनके जनाजे की नमाज में शामिल हुए। लेकिन जगह के अभाव में उनके जनाजे की नमाज मनपा के मैदान में लोगों को पढ़ना पड़ा।
यहां दूर जराज से आए लोगों ने राज्य सरकार की सराहना की, वहीं जनाजे को कब्रिस्तान ले जाने के दौरान लोगों ने सरकार की खूब खिल्ली उड़ाई। बहरहाल स्व. तांबोली को करीब से जानने वाले अब्दुल हमीद शेख उर्फ चमेली ने बताया की पिछले कई वर्षो से मय्यत को कब्रिस्तान ले जाने के मामले उठते रहे हैं। लेकिन हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर लोग टाल देते हैं। जिसके कारण मजबूरन हम लोगों को रेलवे के प्लेटफार्म से होकर कब्रिस्तान जाना पड़ता है। वहीं कुर्ला पूर्व निवासी वाजिद शेख ने बताया कि करीब दो लाख की जनसंख्या के बीच मात्र एक ही कब्रिस्तान है।
इसलिए कुर्ला पूर्व व पश्चिम के मुसलमानों की मय्यत को कब्रिस्तान ले जाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत कर रेलवे के पादचारी पुल और प्लेटर्फाम से गुजरना पड़ता है। जबकि कसाईवाडा कब्रिस्तान के पास रहने वाले समाजसेवक इरफान तांबोली का कहना है कि यहां हर चुनाव में राजनितिक लोग दावा करते हैं लेकिन जीने के बाद कोई भी कब्रिस्तान के रास्ते पर ध्यान नहीं देता। उनका कहना है कि कब्रिस्तान का रास्ता नहीं बना तो 2019 के चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।
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