संवाददाता/ मुंबई। मानसून की वापसी के बाद मुंबई के तापमान में वृद्धि हुई है। बुधवार को मुंबई का पारा 36 के पार पहुंच गया। बारिश के बाद तापमान में वृद्धि की वजह से मुंबई शहर एवं उपनगरों में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 15 दिनों में डेंगू के 109 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। मनपा अस्पतालों में वायरल बुखार से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। दूषित पानी की वजह से गैस्ट्रो के 172 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इसके बावजूद मनपा प्रशासन का दावा है कि पिछले सालों के मुकाबले इस साल संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या कम है। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को कोलाबा में तापमान 36.4 एवं सांताक्रुज में 36.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। दो दिनों तक तापमान में कमी की उम्मीद नहीं है।
हर साल सितंबर एवं अक्टूबर के महीने में मलेरिया, डेंगू (Dengue) सहित अन्य संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों की रोकथाम को लेकर मनपा प्रशासन की तरफ से उपाय योजना की जाती है, लेकिन विधानसभा चुनाव व अन्य कारणों की वजह से इस साल उपाययोजनाओं क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो पाया है।
मनपा प्रशासन की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक अक्टूबर माह के पहले पखवाड़े में स्वाइन फ्लू के 3 मरीजों को अलग -अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि मनपा प्रशासन का कहना है कि पिछले साल इसी कालावधि में स्वाइन फ्लू के 16 मरीजों की पहचान की गयी थी। पंद्रह दिनों में गैस्ट्रो के 172 मामले सामने आये हैं। मनपा का दावा है कि पिछले साल इस कालावधि में गैस्ट्रो के मरीजों की संख्या 507 थी। अक्टूबर माह के पहले पखवाड़े में लेप्टो के 18 मरीजों को अलग अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पिछले साल इस कालावधि में लेप्टो के 16 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था।
मनपा प्रशासन की मानें तो मलेरिया, डेंगू के मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है। पिछले 15 दिनों में डेंगू के 109 मरीजों को अलग- अलग अस्पतालों में दाखिल कराया गया, जबकि मलेरिया के 240 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। प्रशासन की मानें तो इस साल मलेरिया से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। मनपा के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दी गयी जानकारी के मुताबिक वर्ष 2018 के अक्टूबर माह के पहले पखवाड़े में डेंगू के 249 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था जिसमें से 2 की मौत हुई थी, जबकि मलेरिया के 513 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था जिसमें से एक की मौत हुई थी।
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