सरकार का उज्जवला दिवस
मुंबई। सोशल मीडिया (Social media) पर उन्नाव और कठुआ गैंगरेप (Unnav and Kathua Gangrape) को लेकर कथित रूप से भारत बंद की चर्चा के दिन ही 20 अप्रैल को प्रधानमंत्री उज्जवला दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सरकार की ओर से नोडल अधिकारियों को तैनात किया गया था। ताकि अधिक से अधिक महिलाओं की भीड़ जुटाया जा सके। भीड़ जुटाने के लिए भाजपा महिला मोर्चा की सदस्यों, एलपीजी के सभी वितरकों, महिला संगठनों, शिक्षिकाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गृहणियों को भी यह जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद भी बीपीएल परिवार की भीड़ को जुटाने में सरकार नाकाम रही।
मिली जानकारी के अनुसार मुंबई में एचपीसीएल (HPCL) के करीब 60, बीपीसीएल (BPCL) के 90 और इंडियन ऑल (Indian Oil) की 7 से 8 एजेंसियां हैं। इनमें पूर्वी उपनगर के कुछ वितरकों पर विभिन्न विभागों में मामले चल रहे हैं। सूत्रों की माने को कुर्ला पूर्व, चेंबूर और मानखुर्द के वितरकों पर राशनिंग विभाग, फायर ब्रिगेड, विस्फोटक विभागों में कई मामले लंबित हैं। ऐसे वितरकों ने उज्जवला दिवस पर बड़ी संख्या में किराये कि महिलाओं को जमा किया था और अब वाह-वाही लुट रहे हैं।
सरकारी दावाः- केंद्र सरकार ने दावा किया है कि इस योजना के तहत 9 करोड़ बीपीएल (BPL) परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिया जाएगा। उज्जवला दिवस के दिन यह भी कहा गया कि अब तक 3.5 करोड़ बीपीएल परिवारों को एलपीजी दिया जा चुका है। वहीं जानकारों का कहना है कि मौजूदा एलपीजी प्लांट की क्षमता पहले जीतना ही है और खाली सिलेंडरों की संख्या भी उतना ही है। इसके अलावा ओ आई एस डी (ऑयल इंडस्ट्रीज सेफ्टी डायरेक्टरेट), विस्फोटक आदि विभागों की सहमति के बगैर सरकार ने 3.5 करोड़ बीपीएल परिवारों को कैसे न्यू कनेक्शन दिया?
विश्वस्त सूत्र और सर्वेक्षण के अनुसार एक तरफ उन्नाव तो दूसरी तरफ कठुआ गैंगरेप को लेकर सोशल मीडिया पर भारत बंद का आव्हान किया जा रहा था। वहीं दूसरी तरफ भारत सरकार की ओर से 20 अप्रैल को उज्जवला दिवस मनाया गया। इस दिन सेफ्टी क्लिनिक का भी आयोजन किया गया। बता दें कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (पी एम यू वाई) की लॉन्चिंग 1 मई 2016 को हुई थी। उज्जवला दिवस को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर की गई थी।
इसके तहत कार्यक्रम स्थल पर अधिक से अधिक बीपीएल परिवार की महिलाओं को जुटाने के लिए देश के सभी एलपीजी वितरकों एवं कई गैर सरकारी संस्थाओं की मदद ली जा रही थी। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के लिए नोडल अधिकारियों के नेतृत्व में बैठकों के कई दौर हुए। उज्जवला योजना कि असफलता की संभावनाओं को भांपते हुए सरकार द्वारा भाजपा महिला मोर्चा की सदस्यों को भी साथ जोड़ा दिया। ताकि पीएमयूवाई को सफल बनाया जा सके।
बता दें कि बीपीएल परिवारों को समय पर रसोई गैस (एलपीजी) मुहैया कराने वाली इस योजना में बीपीएल परिवारों की गैर मौजूदगी को देखते हुए लगभग सभी वितरकों द्वारा किराये के लोगों से कार्यक्रम स्थल परिसर को भरा गया। ताकि यह दिखाया जा सके की प्रधानमंत्री की उज्जवला योजना सफल रही। वहीं दावा किया जा रहा है कि मौजूदा समय में किराये की महिलाओं को जमा कर मुंबई सहित देश के लगभग सभी वितरक अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। आसमान छूती महंगाई में मुंबई सहित देश के अधिकांश बीपीएल धारकों द्वारा पैसों के अभाव में अपना कनेक्शन बेच चुके हैं या उसका इस्तेमाल नहीं करते।
गौरतलब है कि वाह-वाही लूटने के लिए जिन वितरकों ने उज्जवला दिवस का फोटो या वीडियो अपने वेबसाईट पर अपलोड किया है। उसे देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि इस कार्यक्रम में बीपीएल परिवार के लोग हैं या…? बता दें कि वर्ष 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा था की नकल में भी अकल की जरूरत होती है! ऐसे में उज्जवला दिवस के कार्यक्रम में वितरकों द्वारा अपलोड किया गया फोटो और वीडियो मोदी जी के उक्त मुहावरे को चरितार्थ करता है।
भारत सरकार की ओर से 20 अप्रैल को उज्जवला दिवस पर प्रशासनिक तैयारियों के बावजूद कार्यक्रम स्थल पर किराये के लोगों को ही देखा गया। जबकि इसके लिए कई नोडल अधिकारियों को तैनात किया गया था। नोडल अधिकारियों ने अधिक से अधिक भीड़ जुटाने के लिए भाजपा महिला मोर्चा की सदस्यों, एलपीजी के सभी वितरकों, महिला संगठनों, शिक्षिकाओं सामाजिक कार्यकर्ताओं, गृहणियों को प्रशिक्षण देने के बाद जिम्मेदारी भी दी थी। इसके बावजूद सरकार का उज्जवला दिवस टांय-टांय फीस हो गया।
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