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आत्महत्याओं से डरी सरकार ने जारी किया फरमान

मुंबई। मंत्रालय परिसर में होने वाली आत्महत्याओं से फडणवीस सरकार डर सी गई है। महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रालय में बैठने वाले अफसरों को फरमान जारी किया है कि वे रोज एक घंटे लोगों की समस्याएं सुनें। गुरुवार को जारी फरमान में सरकार ने अफसरों को निर्देश दिया है कि वे अपनी समस्याएं लेकर मंत्रालय आने वाले आम लोगों की समस्याएं रोज दोपहर ढाई बजे से साढ़े तीन बजे तक यानी एक घंटे सुनें।

इतना ही नहीं, जिला और संभाग स्तर पर बैठने वाले उप विभागीय अधिकारियों और उनसे बड़े स्तर के अधिकारियों को भी सप्ताह में दो दिन- सोमवार और शुक्रवार को 3 बजे से 5 बजे तक दो घंटे का वक्त जनता की समस्याएं सुनने का निर्देश दिया गया है। उनसे यह भी कहा गया है कि वे अपने दफ्तरों के बाहर बोर्ड लगाकर आम जनता को इसकी सूचना भी दें।

सरकार ने चार साल सत्ता में रहने के बाद अब जाकर ‘जीरो पेंडेसी और डेली डिस्पोजल’ प्रणाली अपनाने का फरमान भी दिया है। अब फाइलों को लटकाने के बजाए जिस दिन फाइल आए, उसी दिन उसका निपटारा किया जाएगा। यह नई व्यवस्था 18 अप्रैल से लागू होने वाली है।

इस बीच, शुक्रवार को मंत्रालय के सामने एक बुजुर्ग महिला सखुबाई विट्ठल झाल्टे (60) ने जहर पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। वह नाशिक के चांदवड तहसील के वडगांवबंगु की हैं। कई वर्षों से उनकी जमीन का विवाद चल रहा है। पुलिस ने उन्हें सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

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