देश के टॉप टेन शहर का अनोखा गांव घनसोली

दिव्या पाटिल/ नवी मुंबई। विभिन्न कारणों से नवी मुंबई (Navi Mumbai) का घनसोली गांव सुर्खियों में रहा है। इस बार गवली देव पर्वत (Gawli Dev Hill) एवं स्वच्छता को लेकर चर्चाओं में है। हरियाली के लिए प्रसिद्ध यहां का प्राचीन गवली देव पर्वत इन दिनों सूखे की चपेट में है। जबकि राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान के सर्वेक्षण में नवी मुंबई के साथ-साथ घनसोली गांव दसवें स्थान पर है। इसके अलावा यहां के स्वतंत्र सेनानी भूमि पुत्रों के बलिदान के इतिहास को भुलाया नहीं जा सकता।

खबर के मुताबिक नवी मुंबई का इकलौता घनसोली गांव (Ghansoli Villege) अपनी प्राचीन परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इस गांव में अधिकांश वारकरी समाज के लोग रहते हैं। इस गांव में सभी त्यौहारों को पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। घनसोली गांव के मूल निवासी एक दूसरे के संबंधियों जैसा रहते हैं। यहां की पारंपरिक पोशाक में महिलाओं के लिए नव वारी साड़ी और पुरूषों में रूमाल का चलन है। लेकिन आधुनिकता के इस युग में लोग हर तरह के फैशन और पोशाकों का लुत्फ लेने लगे हैं। इस इलाके की प्राचीन गवली देव पर्वत देखने लायक है।

गवली देव पर्वत का अनोखा झील लोगों को लुभाता है। इसे देखने के लिए न केवल शहर बल्कि राज्य व देश के अन्य शहरों से भी पर्यटक आते हैं, और यहां की ख़ूबसूरत वादियों में खो जाते हैं। लेकिन सरकार की अपेक्षाओं के कारण अब यह झील सूखे की भेंट चढ़ चुका है। इसके बावजूद पर्यटकों का आना बंद नहीं हुआ। इस कड़ी में दिलचस्प बात यह है की गवली देव पर्वत का झील सूखने के बाद भी हरियाली में कोई कमी नहीं आई है। इसके अलावा लगभग लाखों की आबादी वाला घनसोली गांव नवी मुंबई के आखिरी छोर पर स्थित है। इस गांव के लोग खुद अपने घर व बाहरी क्षेत्रों की सफाई करते हैं जिसके कारण यहां आने वाला हर शख्स तारीफ करता पाया जाता है।

स्वच्छता के मामले में यहां के मूल निवासी हमेशा सक्रिय रहते हैं। यही कारण है की नवी मुंबई के इतिहास में घनसोली का नाम भी जुड़ा है। इस गांव की बेहतरी के लिए सभी एक जुट रहते हैं। यहां सभी त्यौहारों को हषोल्लास के साथ मनाया जाता है। घनसोली के त्यौहारों में बूढ़े बुजुर्गों की सलाह ली जाती है। यहां की महिलाएं व नन्हे मुन्ने बच्चे आकर्षण का केंद्र बनते हैं। इस गांव को भूमि पुत्रों की धरती माना जाता है। इतिहास गवाह है देश के स्वतंत्रता में यहां के शूरवीरों ने अपने प्राणों की आहूति दी है और अब भी वतन की रक्षा में खुद को न्यौछावर करने का माद्दा रखते हैं। यहां के भूमि पुत्रों की मिसाल राज्य के अन्य ग्रमीण क्षेत्रों में दी जाती है। वहीं यहां का स्याह पहलू बिजली है। राज्य सरकार की अनदेखियों का नतीजा है की घनसोली की प्राकृतिक सुंदर वादियों में अकसर बिजली का अभाव रहता है। आधुनिकता के इस युग में भी यहां बिजली का अभाव है जिसके कारण विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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