गैस एजेंसी की मनमानी
मुंबई। बाल कल्याण नगरी आगरवाड़ी (Bal Kalyan Nagari Agarwadi) और मानखुर्द स्टेशन रोड (Mankhurd Station Road) के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय के छात्रों पर मौत का खतरा मंडराने लगा है। चूंकि इन दोनों स्थानों पर गैस एजेंसी ने कब्जा कर रखा है। बता दें कि प्राथमिक विद्यालय की तंग गेट से सटे ”होनेस्टी गैस सर्विस” (Honesty Gas services) का कार्यालय है वहीं दूसरी तरफ बाल कल्याण नगरी के सामने गैस सिलेंडरों से लदे वाहनों को खड़ा किया जाता है। ऐसे में यहां कभी भी बड़े खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित चिल्ड्रेन एड सोसायटी के आगरवाड़ी स्थित बाल कल्याण नगरी और मानखुर्द स्टेशन रोड के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय के परेशान छात्रों पर खतरा मंडराने लगा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अन्होनी को भांपते हुए विभाग द्वारा गैस एजेंसी को नोटिस दिया है। उक्त नोटिस में कहा गया है कि इस परिसर में गैस सिलेंडरों के वाहनों को खड़ा करना मना है।
इसके बाद भी ”होनेस्टी गैस सर्विस” को नोटिस का कोई असर नहीं हुआ। इस कड़ी में दिलचस्प बात यह है कि एचपीसीएल की नीतियों से हट कर चल रही ”होनेस्टी गैस सर्विस” के पास अपना निजी गोदाम नहीं है। इसके बावजूद राशनिंग विभाग व एच पी के अधिकारियों की मिली भगत से ”होनेस्टी गैस सर्विस” के संचालकों द्वारा मनमानी तरीके से रसोई गैसों की सप्लाई की जा रही है।
”होनेस्टी गैस सर्विस” वालों की शुरू से जांच होनी चाहिए। ताकि कांदिवली के दामूनगर, कुर्ला पश्चिम के किनारा होटल और पार्क साईट रसोई गैस हादसे जैसे मामलों को टाला जा सके। इन हादसों में काफी लोगों को जान-माल का नुकसान हुआ था। इस लिहाज से ”होनेस्टी गैस सर्विस” की जांच होनी चाहिए, किसके नाम पर और बीना गोदाम के कैसे एजेंसी को पास किया गया। इनके पास कितने उपभोक्ता हैं आदि?
स्थानीय सूत्रों की माने तो मानखुर्द के आगरवाड़ी स्थित बाल कल्याण नगरी के सामने टाटा पावर का हाई वोल्टेज बिजली की सप्लाई है, वहीं ”होनेस्टी गैस सर्विस” के छोटे बड़े रसोई गैस से भरे वाहनों को खड़ा किया जाता है। कयास लगाया जा रहा है कि एक तरफ हाई वोल्ट बिजली तो दूसरी तरफ रसोई गैस का खतरा इन छात्रों पर मंडरा रहा है। ऐसे में हादसों से इंकार नहीं किया जा सकता, अगर हादसा हुआ तो हजारों बच्चों की जान जा सकती है। यहां के बाल छात्रों को बचाना मुश्किल ही नहीं नामुमकीन हो सकता है।
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