मुंबई। महाराष्ट्र के चार आदिवासी विद्यार्थियों मनीषा धुर्वे, प्रमेश आले, उमाकांत मडवी और कविदास कातमोडे ने दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट को फतह करने में सफलता पाई है। एकात्मिक आदिवासी परियोजना चंद्रपुर, जिला प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग ने आदिवासी विद्यार्थियों के स्वाभाविक साहस और शौर्य को बढ़ावा देने के लिए ‘मिशन शौर्य’ शुरू किया। पिछले महीने चंद्रपुर जिले के बोरडा और देवडा जिवती ब्लॉक के 10 आदिवासी विद्यार्थियों को इस मिशन के लिए भेजा गया।
इनमें तीन लड़कियां- मनीषा धुर्वे, इंदु कन्नाके, छाया आत्राम और सात लड़के- प्रमेश आले, उमाकांत मडवी, कविदास कातमोडे, आकाश मडवी, आकाश अत्राम, शुभम पेंदोर और विकास सोयाम शामिल थे। इनमें से चार एवरेस्ट पर झंडा फहरा चुके हैं, जबकि छह विद्यार्थियों का अभियान जारी है। विकास सोयाम और इंदु कन्नाके कामयाबी के काफी नजदीक हैं।
सांगली की 10 साल की उर्वी पाटील ने हिमालय की शिवालिक रेंज में 13,800 फुट ऊंचाई पर घने अंधकार, 8 डिग्री सेल्सियस तापमान, 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही हवा और बर्फबारी के बीच सरपास शिखर पर पहुंची। अब वह एवरेस्ट फतह करना चाहती है। पिछले साल जुलाई में इन विद्यार्थियों को दार्जिलिंग और लेह-लद्दाख में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण दिया गया। 11 अप्रैल को ये मुंबई से काठमांडो के लिए रवाना हुए। इन्हें राज्यपाल विद्यासागर राव, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और आदिवासी विकास मंत्री विष्णु सावरा ने रवाना किया था।
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