भारी पड़ सकता है अतिक्रमण को संरक्षण
संवाददाता/ मुंबई। अंधेरी (Andheri) की एक सोसायटी के अतिक्रमण को हटाने के बजाय अदालत को गुमराह करने वाले मनपा के पश्चिम के दो अभियंताओं को न्यायाधीश ने जोरदार फटकार लगाई है। इतना ही नहीं 2016 से चल रहे विवादित अतिक्रमण को नहीं हटाने के मुद्दे पर दोनों अभियंताओं से स्पष्ठीकरण देने को कहा है। इससे बौखलाये अभियंताओं ने अदालत की फटकार के बाद अतिक्रमित ढांचे को जड़ से उखाड़ फेंका।
मिली जानकरी के अनुसार अंधेरी पश्चिम एस वी रोड पर स्थित ज्येष्ठ नागरिकों का तीन मंजिला मेट्रो यूनिटी कॉ-आप हाउसिंग सोसायटी है। उक्त सोसायटी के सामने व फुटपाथ पर चार दुकानदरों ने स्थाई रूप से अपनी बड़ी- बड़ी दुकानें सजा रखी थी। इनमें (1) महावीर फर्नीचर, (2) जीएमआरडी हाउस होल्ड स्टोर्स, (3) भारत स्टोर्स्ट (यह अकसर बंद रहता है), (4) कोहिनूर स्टोर्स का समावेश है।
इन दुकानदारों ने मानसून का बहाना बनाकर स्थाई दुकान बनाकर मनपा के अभियंताओं से सांठ-गांठ कर अपनी दुकानें चला रहे थे। इस मामले की शिकायत वर्ष 2016 में ज्येष्ठ नागरिकों ने मनपा के पश्चिम के बिल्डिंग एंड फैक्ट्री विभाग के डीएमसी, वार्ड अफसर और अभियंताओं से की थी।
करीब दो दर्जन शिकायतों के बाद भी अतिक्रमण विभाग के अभियंताओं ने कोई कार्रवाई नहीं की तो सोसायटी के सचिव जाकिर शेख ने इस मामले को जनता दरबार मे उठाया। यहां भी अभियंताओं को फटकार मिली और जल्द से जल्द अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया गया। इसके बाद भी सहायक अभियंता मिलिंद वसंत हेडाव और कनिष्ठ अभियंता वैभव घोडके ने कोई कार्रवाई नहीं की।

काफी लंबे समय से परेशान ज्येष्ठ नागरिकों ने सोसायटी के सामने व फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की शिकायत सबंधित विभागों से करते रहे हैं। लेकिन इन दोनों अभियंताओं के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। इसके बाद भी कोई कार्रवाई न होता देख सोसायटी के सचिव ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
यहां शीर्ष अदालत के न्यायाधीश एस जे काथावाला और बी पी कोलाबा वाला की अदालत में उक्त मामले की सुनवाई हुई। यहां अदालत ने दोनों अभियंताओं के अलग-अलग बयान दर्ज करते हुए अतिक्रमित स्थल को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने का आदेश दिया। साथ ही वर्ष 2016 से अब तक अतिक्रमण नहीं हटाने के मुद्दे पर दोनों अभियंताओं से स्पष्टीकरण देने को कहा है। अदालत के आदेश के बाद दोनों अभियंता अपने बचाव में एक दूसरे को कटघरे में खड़ा करने में लगे हैं।
इन दोनों अभियंताओ पर एक तरफ अदालत तो दूसरी तरफ मनपा की तलवार लटकी है। इससे दोनों की नौकरी दांव पर लग गई है। चूंकि दोनों अभियंताओं के बयान अदालत के पास है। यहां कनिष्ठ अभियंता वैभव घोडके ने अपना पल्ला झाड़ते हुए सहायक अभियंता मिलिंद वसंत हेडाव के मौखिक व लिखित आदेशों का हवाला भी दिया है। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा की कौन किसकों दोषी ठहराने में सफल होता है।
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