मुंबई। हर साल सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद मुंबई मनपा स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घट रही है। स्कूलों की तरफ बच्चों को आकर्षित करने की योजना विफल साबित हो रही है। विद्यार्थियों की संख्या कम होने की वजह से शिक्षा विभाग ने 22 स्कूलों को बंद कर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। इस संदर्भ में प्रशासन की तरफ से प्रस्ताव तैयार कर शिक्षण समिति के समक्ष पेश किया गया है जिस पर सोमवार को होने वाली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
मनपा स्कूलों की तरफ बच्चों को आकर्षित करने एवं शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि करने को लेकर विद्यार्थियों को यूनिफार्म,पुस्तक, बैग सहित 27 वस्तुएं, आठवीं से दसवीं तक के विद्यार्थियों को टैब दिया जाता है। इसके अलावा वर्चुअल क्लास सहित अन्य कई तरह की योजनाएं शुरू की गयी हैं। मनपा एक विद्यार्थी पर साल में 40 से 45 हजार रुपए खर्च करती है। लेकिन मराठी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की बजाय घट रही है।
अभिभावक मनपा स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर आशंकित हैं वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाते हैं जिसकी वजह से सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद विद्यार्थियों के अभाव में स्कूलों को बंद करना पड़ रहा है। मनपा की शिक्षण समिति के समक्ष पेश किये गए प्रस्ताव के मुताबिक वर्ष 2016-17 एवं 2017 -18 में 15 स्कूलों का विलीनीकरण किया गया है। जिसमें कुर्ला स्थित संभाजी चौक, घाटकोपर में असल्फा विलेज, कुर्ला के काजूपाडा, चेंबूर में गवाणपाड़ा, पवई, घाटकोपर के साईनाथनगर, मानखुर्द स्थित आगरवाड़ी एवं विक्रोली पार्कसाइट कुल 8 मराठी स्कूलों का समावेश है।
इसके आलावा गुजराती, हिंदी, अंग्रेजी, दो उर्दू एवं दो तेलगू स्कूल भी बंद किये गए हैं। 2018-19 शैक्षणिक वर्ष में और 7 स्कूल बंद किये जाने हैं। ये सभी स्कुल मराठी माध्यम के हैं। इसमें चेंबूर स्टेशन, चेंबूरनाका, भांडुप टेंबीपाडा, पवई पासपोली, मुलुंड गोशाला मार्ग, मुलुंड कैम्प एवं मुलुंड स्थित लाल बहादूर शास्त्री मार्ग स्कूल का समावेश है। इन सभी स्कूलों में पिछले 5 सालों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किये गए, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला।
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