डॉ. उलरिच ने कहा मुझे डॉ. खान से बहुत कुछ है सीखना
मुंबई। अपने इरादों के पक्के और जिद्दी साइंटिस्ट मुनीर खां को आखिर जर्मन के एक बड़े डॉक्टर का साथ मिल गया। उनकी प्रतिभा के कायल हुए जर्मनी के मशहूर डॉ. उलरिच रेंडॉल। उन्होंने साइंटिस्ट खान के इलाज के तरीकों को क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने कहा कि मुनीर खां दरअसल बीमारियों को जड़ से खत्म करने में यकीन रखते हैं, इस लिए उनसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
डॉ. उलरिच जर्मनी के म्यूनिख शहर के रहने वाले हैं। करीब दो बरस पहले उनके एक दोस्तों ने साइंटिस्ट मुनीर खां के इलाज और उनकी दवाओं के बारे में बताया था। लाइलाज बीमारियों को ठीक कर देने का दावा करने वाले डॉ. खान के बारे में सुनी कहानियों ने उन्हें इंटरनेट पर उनके बारे में जानने को प्रेरित किया, इंटरनेट पर काफी कुछ देखने और समझने के बाद वो भारत आने को मजबूर हो गए। इस कड़ी में डॉ. उलरिच पिछले साल भारत का दौरा भी किया।
रोगियों के इलाज के लिए अपनाए गए तरीकों और दवाओं के लिए डॉ मुनीर खान विवादों में रहे हैं। जो लोग मुनीर खां से जुड़े विवाद से वाकिफ हैं, उनका मानना है कि दरअसल उनके क्लिनिक पर रोगियों की बढ़ती भीड़ सारी समस्याओं की जड़ है। मुंबई के डॉक्टरों की ताकतवर लॉबी से देखा नहीं गया और बड़े डॉक्टरों और दवाई कंपनियों ने उनके खिलाफ चमत्कारी दवा बेचने के आरोप लगवाए और पुलिस केस करवा दिया था। नतीजतन डॉ. खान को कुछ दिन जेल में बिताना पड़ा। लेकिन जेल से वापस लौट कर इरादों के पक्के खान ने फिर से अपना काम शुरू कर दिया। डॉ. मुनीर खान का इलाज का तरीका विशुद्ध तौर पर आयुर्वेद पर आधारित है और उनका दावा है कि वे कैंसर के उन मरीजों को भी ठीक कर चुके हैं, जिन्हें मुंबई के बड़े-बड़े डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था।
जर्मन डॉ. उलरिच रेंडॉल मुंबई स्थित क्लिनिक में उनसे मिले और कुछ दिन उन्होंने डॉ खान के इलाज का तरीका देखा, उसे समझने की कोशिश की। उनके मुताबिक मुझे लगा कि उनसे मिलना चाहिए, क्योंकि उनसे मुझे बहुत कुछ सीखना है। डॉ. उलरिच सेल यानी कोशिकाओं के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। बीमारी के लक्ष्णों की अलग-अलग डायग्नोसिस पर नहीं जाते, बल्कि बीमारी की असली जड़ तक पहुंच कर उसे ठीक करने की कोशिश करते हैं। इसका मतलब ये कि वे मूल रूप से शरीर के मुताबोलिज़्म को इलाज का आधार बनाते हैं। मतलब मुताबोलिज़्म के जरीये वे शरीर की सफाई पर अपना इलाज केंद्रित करते हैं।
डॉ. उलरिच ने डॉ. खान के इलाज पर यूं ही भरोसा नहीं किया। बल्कि कई दिनों तक डॉ. मुनीर खान की क्लिनिक में बिताने के बाद, वापस जर्मनी लौटते समय डॉ. खान की दवाएं अपने साथ लेते गए। जर्मनी जा कर डॉ. उलरिच ने उन दवाओं का प्रयोग खुद पर किया और उसके नतीजों से हैरान रह गए। इन दवाओं में शहद का स्वाद है, जो बहुत सामान्य सी बात है। मैंने दवाई की खुराक हर दूसरे दिन लेनी शुरू की। कुछ ही दिन बाद मैंने महसूस किया कि मेरी यूरीन पहले से बहुत गाढ़ी हो गई है। मतलब साफ था कि ये दवाएं लेने के बाद मेरे शरीर में रक्त संचार के सिस्टम में कुछ बदलाव आया है।
पहले तो मैं बहुत घबरा गया क्योंकि मैंने अपने पूरे जीवन में इस तरह की, कोई दवा नहीं ली। लेकिन डॉ. खान की दवा लेना जारी रखा और जल्दी ही महसूस करने लगा कि मेरा शरीर पहले से हल्का हो गया है, मैं पहले से बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। अब तो मैं इस दिशा में सोच रहा हूं कि कैसे इलाज के इस नायाब तरीके को दुनिया भर में फैलाया जाए और लोगों को उनके लाइलाज रोगों से मुक्ति दिलाई जाए। जो चीज मानवता के लिए अच्छी है, उसे पूरी दुनिया में फैलाना चाहिए।
उधर, मुंबई में डॉ मुनीर खान ने इस खबर से संतोष जताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा लोगों की बेहतरी के लिए काम किया है और प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया का प्रारूप सदैव उनका लक्ष्य रहा है। डॉ खान मानते हैं आयुर्वेद इसी धरती की विद्या है और भारत के लोगों को इसे दुनिया भर में फ़ैलाने का काम करना चाहिए। डॉ खान मानते हैं कि वे प्रधानमंत्री की स्किल इंडिया योजना के बहुत बड़े मुरीद हैं और मानते हैं कि इस योजना के तहत दवाएं बनाने और लोगों तक प्रचार-प्रसार में लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही, वे सक्ष्म भी बन पाएंगे। हुनरमंद बन कर वे देश की तरक्की में बढ़ोत्तरी कर सकेंगे।
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