एमईआरसी ने अडानी से मांगा महंगी बिजली का हिसाब

मुंबई। अडानी इलेक्ट्रिक कंपनी द्वारा मुंबई के उपनगरों में बिजली वृद्धि दर महंगी पड़ सकती है। महाराष्ट्र राज्य विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) ने उपनगरों में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड से ग्राहकों को दी जा रही महंगी बिजली का हिसाब मांगा है। मंगलवार को एमईआरसी ने अडानी इलेक्ट्रिसिटी को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब देने को कहा है।

बता दें कि अडानी इलेक्ट्रिसिटी की महंगी बिजली के खिलाफ मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरुपम ने पिछले कुछ दिनों से आंदोलन छेड़ रखा है। उन्होंने बिजली कंपनी पर उपनगरवासियों को लूटने का आरोप लगाया है। एमईआरसी ने अपने नोटिस में कहा है कि हमने बिजली दरों की मध्यावधि समीक्षा के बाद अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड जिन क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति करती है, उन क्षेत्रों में 2018-2019 के लिए औसतन सिर्फ 0.24 प्रतिशत दरें बढ़ाने की मंजूरी दी थी।

ये नई दरें 1 सितंबर 2018 से लागू की गई हैं। अब अडानी इलेक्ट्रिसिटी के बिजली उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि उनसे वास्तविक मीटर रीडिंग के मुताबिक बिल वसूले जाने के बजाए एवरेज बिल वसूला जा रहा है।

एमईआरसी ने नोटिस में कहा कि बिजली की दरों में मामूली बढ़ोत्तरी की आयोग की मंजूरी से ज्यादा पैसे वसूलने की उपभोक्ताओं की शिकायतों को आयोग ने गंभीरता से लिया है। इसीलिए अडानी इलेक्ट्रिसिटी को 24 घंटे के भीतर इस मामले में सभी तथ्यों के साथ यह भी बताना होगा कि उसने इस मुद्दे को हल करने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

उपनगरों में अडानी की महंगी बिजली के खिलाफ लोगों के गुस्से को देखते हुए मुंबई भाजपा के अध्यक्ष आशीष शेलार इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से कर चुके हैं। उनकी शिकायत पर मुख्यमंत्री ने एमईआरसी को जांच का आदेश दिया था। इसके बाद एमईआरसी ने अडानी इलेक्ट्रिसिटी को नोटिस जारी किया।

बता दें कि बिजली की बढ़ी हुई दरों के खिलाफ जब आंदोलन शुरू हुआ, तो अडानी इलेक्ट्रिसिटी ने सफाई दी थी कि उसने बिजली की दरें अपने मन से नहीं बढ़ाई हैं, बल्कि एमईआरसी की मंजूरी के मुताबिक दरें बढ़ाई हैं। ऐसे में एमईआरसी के नोटिस से कंपनी के दावे पर सवालिया निशान लग गया है। हालांकि कंपनी का यह भी दावा है कि अक्टूबर में बिजली की खपत 18 प्रतिशत बढ़ने से बिल बढ़े हैं।

अडानी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले निरुपम खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि इस वर्ष अगस्त में अनिल अंबानी ने दिवालिया हो चुकी अपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को 18,800 करोड़ रुपये में अडानी ग्रुप को बेचा था। इस लेन-देन से 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ मुंबईवासियों पर पड़ा है। निरुपम का सवाल है कि यह अधिभार मुंबईकरों क्यों भरें। निरुपम का आरोप है कि पहले की रिलायंस एनर्जी के मुकाबले अब अडानी इलेक्ट्रिसिटी की दरों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। 100 यूनिट तक बिजली की श्रेणी में रिलायंस के बिल में निश्चित शुल्क प्रति महीने 55 रुपये था, जो अडानी के बिल में बढ़कर 60 रुपये हो गई है। इसी तरह 101 यूनिट से 300 यूनिट और 301 यूनिट से 500 यूनिट की श्रेणी में भी बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा प्रति यूनिट पर ऊर्जा शुल्क, ईंधन समायोजन शुल्क और बिलिंग शुल्क भी बढ़ाया गया है।

निरुपम का कहना है कि एमईआरसी के अधिकारियों की मिलीभगत से यह लूट चल रही है। ग्राहकों के गुस्से को देखते हुए नोटिस और जांच का नाटक किया जा रहा है। एमईआरसी सरकार के नियंत्रण वाली संस्था है। इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 में यह प्रावधान है कि अगर सरकार चाहे, तो जनता के हित में आयोग को बढ़ी हुई दरें वापस लेने का आदेश दे सकती है। जांच और नोटिस का नाटक करने के बजाय ग्राहकों से सितंबर और अक्टूबर में जो ज्यादा बिल वसूले गए हैं, वह रकम उन्हें वापस की जाए। बिजली दरों में बढ़ोतरी भी तत्काल वापस ली जाए।

 


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