मुंबई। पिछले पांच वर्षों में मुंबई में डेंगू के मामलों में 365 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मामले की गंभीरता को दखेते हुए प्रजा फाउंडेशन ने जानकारी देते हुए बताया कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 -13 में सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरी में डेंगू के मामलों की संख्या 4,867 थी जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 17, 771 हो गई।
स्वास्थय एवं चिकित्सा के नाम पर मुंबई मनपा हर साल तीन हजार 300 करोड़ रुपए से भी अधिक खर्च कर रही है, लेकिन लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहूंच पा रही हैं। मुंबई में हर रोज टीबी से लगभग 18 लोगों की मौत हो रही है, संक्रामक बीमारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस तरह का दावा सामाजिक संस्था प्रजा फाउंडेशन ने किया है।
बुधवार को प्रेस क्लब में मुंबई की स्वास्थ्य सेवाओं का रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए प्रजा फाउंडेशन के परियोजना निदेशक मिलिंद म्हसके ने कहा कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को लेकर मनपा विफल साबित हुई है, इसके लिए निर्वाचित प्रतिनिधि भी जिम्मेदार हैं। संस्था को मिले आंकड़ों को मुताबिक मुंबई में टीबी के मरीजों की संख्या घटने की बजाय बढ़ रही है।
वर्ष 2012-13 में टीबी के मरीजों की संख्या 36 हजार 417 थी, जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 50 हजार एक हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में हर रोज टीबी से लगभग 18 लोगों की मौत हो रही है। हालांकि टीबी से निपटने के लिए चलाए जा रहे सरकारी कार्यक्रम डाट्स के पंजीकरण में कमी आई है। प्रजा फाउंडेशन ने स्वास्थ सेवाओं की खामियों के लिए जनप्रतिनिधियों को भी जिम्मेदार ठहराया है।
संस्था के रिपोर्ट कार्ड में कहा गया है कि नगरसेविकों का ध्यान सेवाएं उपलब्ध कराने में कम नामकरण में अधिक होता है। पिछले पांच सालों में नगरसेवकों ने टीबी की बीमारी एवं रोकथाम को लेकर केवल 45 सवाल उठाए, जबकि अस्पतालों, दवाखानों एवं कब्रिस्तानों के नामकरण के संदर्भ में 68 प्रश्न पूछे गए।
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