कहीं कप्तान ने कहीं कप्तान को किया गया सम्मानित
मुंबई। इरादों के पक्के डैशिंग नगरसेवक कप्तान मलिक (Kaptan Malik) ने अपने वार्ड के अलावा आस-पास के दूसरे वार्डों में भी कई सराहनीय कार्य किये हैं। इस बार उन्होंने भगवान कृष्ण के 5246वां जन्मोत्सव के अवसर पर कुर्ला पूर्व व पश्चिम के करीब 12 से 14 विभिन्न मंडलों के साथ मनाया। इस मौके पर विभिन्न दही- हांडी उत्सव (Dahi Handi Utsav) मंडलों द्वारा कप्तान मलिक को सम्मानित किया गया और इनके हाथों गोविंदा पथकों को पुरस्कृत कराया गया।
बताया जाता है कि प्राचीन काल से महाराष्ट्र और गुजरात में जन्माष्ठमी के मौके पर दही हांडी की प्रथा के साथ इस महोत्सव को काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। दही हांडी प्रथा और गानों पर कई हिन्दी फिल्में भी बनी हैं। बहरहाल पहले सिर्फ युवा लड़कों की टोली होती थी लेकिन अब युवतियां और महिलाओं की टीम भी पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ती हैं। 24 अगस्त 2019 को भगवान कृष्ण का 5246वां जन्मोत्सव मनाया गया। नगरसेवक कप्तान मलिक ने पार्टी और समाज से हटकर मानवता का सबूत देते हुए कुर्ला पूर्व स्थित अपने वार्ड में चुनाभट्टी स्थित मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित दही हांडी उत्सव में विजेता पथकों को सम्मानित किया।
कब मनाया जाता है दही हांडी
शास्त्रों के अनुसार बाल गोपाल कृष्ण जन्म चन्द्रोदय के समय भाद्रपद कृष्ण अष्ठमी को मनाया जाता है। जो कि इस बार 23 अगस्त को मनाया गया। मुंबई में दही हांडी का जश्न जोरों-शोरों से मनाया जा रहा है। इस मौके पर कई जगहों पर श्रीकृष्ण की झाकियां भी निकाली गर्ईं। मुंबई के दादर में धूमधाम से दही हांडी का जश्न मना।
श्रीकृष्ण को कहा जाता है माखन चोर
श्रीकृष्ण अपने बाल अवस्था से ही बेहद नटखट थे, अपनी शरारतों के लिए वे पूरे गांव में चर्चित थे। श्रीकृष्ण को माखन, दही और दूध काफी पंसद था। उन्हें माखन इतना पंसद था कि वे पूरे गांव का माखन चोरी करके खा जाते थे। इतना ही माखन चोरी से रोकने के लिए उनकी मां यशोदा ने उन्हें एक खंभे से बांध दिया। जिसकी वजह से भगवान श्रीकृष्ण का नाम माखन चोर पड़ा।
दही-हांडी की कैसे हुई शुरुआत
वृंदावन में महिलाओं ने मथे हुए माखन की मटकी को ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया। ताकि श्रीकृष्ण का हाथ वहां तक न पहुंचे। लेकिन नटखट कृष्ण की समझदारी के आगे उनकी यह योजना भी फेल हो गई। माखन चुराने के लिए श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक पिरामिड बनाते और ऊंचाई पर लटकाई मटकी से दही और माखन को चुरा लेते थे। वहीं से प्रेरित होकर दही हांडी का चलन शुरू हुआ। दही हांडी के उत्सव के दौरान लोग गाने गाते हैं जो लड़का या लड़की सबसे ऊपर होता है उसे गोविंदा कहा जाता है और ग्रुप के अन्य को हांडी या मंडल कहकर पुकारा जाता है।
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