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करोना के जंग में उतरे चंद उद्योगपति

हॉस्पिटल कर्मियों के सहयोग में उतरे जगदीश त‌ना

मुश्ताक खान/मुंबई। कोविड -19 (करोना वायरस) के खिलाफ जंग में उतरे देशवासियों के साथ उद्योगपतियों को भी मैदान में आना चाहिये। चूंकि अब तक की इस लड़ाई में साधारण वर्ग के लोग और समाजसेवक ही उतरे है। लिहाजा इस जंग को फतह करने के लिए, दिल वालों के साथ साथ दौलत वालो का आना जरूरी है। ऐसे में तन से ना सही धन और खाद्यानों से मदद कर ही सकते हैं।

मिली जानकारी के अनुसार मोदी सरकार द्वारा घोषित कुल 21 दिनों के इस जंग में दिहाड़ी मजदूर, किसान और नीचले तबके के लोगों के सामने भूखमरी की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। वही दूरदराज के इलाकों में लोग कुपोषण का शिकार हो रहे हैं, कहीं खाना तो कहीं पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है, लोग दाने-दाने को मोहताज है। इसे देखते हुए चंद उद्योगपतियों ने सहयोग का हाथ बढ़ाया है, जो की नाकाफी है।

हाल ही में मुंबई के उद्योगपती जगदीश त‌ना की तरफ से जे जे हॉस्पिटल (J J Hospital) और सेन्ट जॉज हॉस्पिटल के सभी डॉक्टर्स, नर्सेस व वार्ड बॉय के लिए 4 हाजार मास्क दिया गया है। इसके अलावा उद्योगपती जगदीश भाई, अधीक्षक डॉ. संजय सूरासे, विभुते, मिर्जा बेग और नाना पालकर स्मृती समिती (Nana Palkar Smriti Samiti) के व्यवस्थापक कृष्णा महाडिक के सहयोग से कैंसर के मरीजों व टाटा मेमोरियल सेंटर (Tata Memorial Centre) के डॉक्टरों के बीच नाश्ता खाना आदि का वितरण किया गया।

कोविड-19 के इस जंग में उन उद्योगपतियों को आना चाहिये जो अब तक टेलीवीजन और व्हाट्सएप आदि पर समाचारो को देख कर अपने घरों में दुबके पड़े हैं। गौरतलब है कि टेलीविजन, व्हाट्सएप या अन्य माध्यमों से मिलने वाले समाचार जमीनी हकीकत कोसो दूर है। वहीं सरकारी आदेश के बाद भी जमीनी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। यह लोग दाने -दाने को मोहताज है। फिलहाल चर्चा है की प्रधानमंत्री राहत कोष में आई राशि का वितरण कोई मायने नहीं रखता। जग जाहिर है की आसमान छूती महंगाई के इस दौर में 500 रु की क्या बिसात है।

इस कड़ी में दिलचस्प बात यह है की सरकारी आदेशों के विपरित प्रशासनिक कार्रवाई से लोग त्रस्त हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन बेमानी साबित हो रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है की गरीब जियें तो जियें कैसे?

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