मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार को उस समय भारी किरकिरी हुई, जब उसने कोर्ट को बताया कि उसके अधिकारी सड़कों को राज्य राजमार्ग (स्टेट हाइवे) के रूप में वर्गीकृत करने वाली अधिसूचना या दस्तावेज को ढूंढ पाने में असमर्थ हैं, यहां तक कि गूगल पर ढूंढने का प्रयास भी विफल रहा है।
गौरतलब है की राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में स्थित शराब की दुकानों को प्रतिबंधित किए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़े विवाद को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही जस्टिस एस.एम.केमकर और एम.एस. सोनक की खंडपीठ ने इस सप्ताह सरकार को राज्य राजमार्ग के रूप में वर्गीकृत सड़कों से जुड़ी अधिसूचना या दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
सरकार के जवाब से नाराज जस्टिस केमकर ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख 12 जून तक अगर राज्य सरकार अधिसूचना प्रस्तुत नहीं कर पाती है, तो न्यायालय को ‘प्रतिकूल आदेश पारित करने के लिए बाध्य होना पडेगा।’
सरकार के इस रुख पर कटाक्ष करते हुए एक बार मालिक ने कहा कि ‘एक तरफ कोर्ट के आदेश से लाखों लोग अपनी रोजी से हाथ धो चुके हैं और करोड़ों रुपयों का निवेश बेकार हो गया है, वहीं सरकारी अधिकारियों को अधिसूचना तक की सुध नहीं है। यह कौन-सी जबावदेही है।’
कोर्ट में इस समय उन शराब स्टोर्स, बार, रेस्टोरेंट और होटलों ने याचिका दायर कर रखी है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का असर पड़ा है, जिसमें कहा गया है कि नैशनल हाइवे के 500 मीटर के अंदर जहां भी शराब मिल रही है, उसे बंद कर दिया जाए।
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