मुंबई। मुंबई उच्च न्यायालय ने जीएसटी कर प्रणाली में विभिन्न तरह के सेस लगाने की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और सीएजी को नोटिस भेजे हैं। न्यायाधीश शांतनु खेमकर और न्यायाधीश राजेश केतकर ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए ये नोटिस भेजे हैं। यह याचिका कानून के एक अध्यापक अर्शिता कोठा ने दायर की है।
इस याचिका में उन्होंने जीएसटी, ऐक्ट 2017 और 15 तरह के अन्य सेसों की वैधता को चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह जीएसटी और अन्य सेस का उद्देश्य महंगी कारों, कोयला आदि और स्वच्छ भारत जैसी योजनाओं के लिए पांच साल तक के लिए राजस्व एकत्र करना था।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार ने स्वयं यह कानून बनाया है कि सेस को केवल कुछ विशिष्ट अवधि तक के लिए वसूला जा सकता है और इसका बंटवारा राज्यों के बीच नहीं किया जा सकता है। लेकिन याचिका में आगे कहा गया है कि जीएसटी कानून के पारित होने के समय सरकार ने नए सेस शुरू करने का कभी प्रस्ताव तैयार नहीं किया, इसलिए इस पूरी राजस्व वसूली प्रक्रिया की वैधता का अध्ययन किया जाना चाहिए।
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