कोरोना से लड़ने में BMC की भूमिका सराहनीय : अंजली नाइक

आनंद मिश्र/ मुंबई। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि का सार्वजनिक जीवन में कैसा रोल होना चाहिए यह जानना हो तो वार्ड क्रमांक 147 की नगर सेविका अंजली नाइक (Anjali Naik) से सीखे। बीएमसी की हाउस में पहली ही बार चुनकर आईं इस नगरसेविका ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत शाखा प्रमुख से की और इनके अच्छे कामों को देखते हुए पार्टी ने पहले इन्हें उपविभाग प्रमुख और बाद में विधानसभा संगठन की जिम्मेदारी इनके कंधों पर डाल दी। इनकी कार्यक्षमता को देखते हुए पार्टी ने इन्हें 2017 के महानगर पालिका के चुनाव में टिकट दिया और जब जीतकर आईं तो बैचलर ऑफ कंप्युटर साइंस की डिग्री धारक श्रीमती नायक को एजुकेशन कमिटी की चेयरपर्सन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जिसका वो बखूबी निर्वाह कर रही हैं। फिलहाल श्रीमती नायक की पूरी कोशिश है कि कोरोना के प्रसार को अपने वार्ड में कैसे रोका जाए और इसके लिए उन्होंने हर संभव तैयारियां और मदद की है। उनके इसी कामकाज को लेकर हमारे प्रतिनिधि आनंद मिश्र ने उनसे बातचीत की। पेश है मुख्य अंश:

Anjali Naik

सवाल: पहले आप यह बताइए कि एजुकेशन कमेटी की चेयरमैन होने के नाते आपने क्या-क्या कार्य किए हैं?
जवाब: अगर मैं अपने कार्यों की लिस्ट गिनाऊँ तो यह काफी लंबी हो जाएगी। जब से मैंने यह जिम्मेदारी संभाली है मैंने काफी सारे इनिशिएटिव लिए हैं। टीचर्स के लिए उनके रिटायरमेंट और फंड के प्रॉब्लम सॉल्व किए हैं। कक्षा 1 से लेकर कक्षा दसवीं तक के बच्चों का रिजल्ट किस तरह से इंप्रूव हो इसके लिए अनेकों उपाय उठाए गए हैं। क्वालिटी एजुकेशन के साथ साथ बच्चों की एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज पर भी अब पूरा ध्यान दिया जा रहा है और कुल मिलाकर उनके अंदर एक कॉन्फिडेंस पैदा करने का अभियान लांच किया गया है, ताकि वे अपने आप को किसी प्राइवेट स्कूल के बच्चों से कम ना समझें।

सवाल: और क्या क्या इनिशिएटिव लिए हैं आपने ?
जवाब: देखिए सबसे पहला इनिशिएटिव तो यह है कि हमें बच्चों को हर उस प्रकार की शिक्षा प्रदान करने की पहल की है जो आज के हालात को देखते हुये काफी महत्वपूर्ण है। खासकर उन बच्चों के लिए जो प्राइवेट स्कूलों की फीस अफोर्ड नहीं कर सकते। हमने कुछ सीएसआर फंड भी जुटाया है। गूगल रूम की स्थापना की है। इसके अलावा भी हमने ई-लर्निंग और ई-लाइब्रेरी स्थापित किया है जो बच्चों में काफी लोकप्रिय हुआ है। हमने टिंकर लैब भही सेट यूपी किया है जिसके जरिए बच्चों में प्रोफेशनल स्किल सेट का ध्यान देकर उनका सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ाया जा रहा है।

सवाल: पर यह भी सच है कि ड्रॉपआउट रेट बढ़ा है.. ?
जवाब: हां यह सच है। पर ऐसा ना हो इसके लिए अपने स्तर पर काफी प्रयास किए हैं। क्वालिटी एडुकेशन देने के लिए हमने बीएमसी स्कूलों के 40 से 50 साल पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारा है। पूरे एजुकेशन सिस्टम की ओवरहालिंग की है और कई जगह बालवाड़ी भी शुरू किया है जिसमें बच्चे फिर से आने लगे हैं।

सवाल: कोरोना के बाद क्या बच्चों की संख्या में कोई कमी आएगी?
जवाब: मुझे लगता है कमी आ सकती है क्योंकि बीएमसी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे के मां-बाप गरीब तबके से आते हैं और उनमें से ज्यादातर लोग महाराष्ट्र के बाहर से थे। लॉकडाउन लगने के बाद कई सारे अभिभावक अपने बच्चों के साथ शहर छोड़कर अपने गृह राज्य चले गए हैं। हालांकि वे वापस अभी आ रहे हैं परंतु बच्चों के बारे में कभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हमने एक सर्वे चालू कराया है ताकि यह पता कर सके कि अगले सत्र में बच्चों की हाजिरी कितनी होगी।

सवाल: कितने बीएमसी स्कूलों को क्वारंटाइन सेंटर के लिए दिया गया है?
जवाब: हमने 197 स्कूलों को, जिसमें बीएमसी के एडेड और नॉन-ऐडेड स्कूल भी शामिल है और इसके अलावा 6 प्राइवेट स्कूलों को कोरोना के मरीजों की रिकवरी के लिए क्वारंटाइन सेंटर बनाने के लिए दिया है।

सवाल: आपकी एरिया में कोरोना की क्या स्थिति है?
जवाब: मैं तो कहूंगी मच बेटर। अब लोगों में धीरे धीरे इसके प्रति डर कम हो रहा है और लोग तेजी से रिकवर हो रहे हैं। बीएमसी के प्रयासों के मार्फत ही मरीजों की दुगनी होने वाली संख्या में अब ज्यादा दिन लग रहे हैं जिससे बीएमसी को अपना काम करने में और अच्छा स्पेस मिल गया है।

सवाल: कोरोना प्रभावितों के लिए आपने अपने स्तर पर क्या-क्या किया है?
जवाब: जब से लॉकडाउन शुरू हुआ तभी से मैंने यह सुनिश्चित किया कि M-East को भूख से ना मरे और इसके लिए मैंने डोर टू डोर जाकर एक नगरसेविका की हैसियत से गरीबों, जरूरतमंदों, मजदूरों, दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगों को खाना बांटा और साथ ही साथ उन्हें राशन किट प्रदान किया। मैंने नियमित अंतराल पर मेडिकल कैंप आयोजित किए और यह सिलसिला अब भी जारी है। मेरे इस कामकाज में सभी शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने काफी मेहनत की। हमारे सांसद राहुल शेवाले को मैं कैसे भूल सकती हूं जिन्होंने हर पल मेरा मार्गदर्शन किया और अपनी तरफ से संसाधन जुटाने में हमारी काफी मदद की और प्रेरणा भी दी। सभी स्लम एरिया में जाकर मैंने उनकी एरिया को सैनिटाइज कराया। टॉयलेट, बाथरूम, प्राइवेट सोसाइटी में सनिटाईजेशन और फॉगिंग करवाया। हेल्थ वर्करों को पीपीई किट, N95 मास्क, थर्मल ऑक्सीमीटर जैसे उपकरण बँटवाया। इतना ही नहीं, जहां-जहां कोरोना प्रभावित एरिया को सील कर दिया गया था, वहाँ वहाँ रमजान के महीने में मैंने रोजेदारों के लिए फलों और सब्जियों का भी प्रबंध किया।

सवाल: बीएमसी के कामकाज को आप किस तरह देती हैं?
जवाब: मुंबई जैसी इतनी बड़ी महानगरी और इतने बड़े जनसंख्या के लिहाज से बीएमसी ने बहुत बड़ा काम किया है। सिर्फ बीएमसी ही नहीं यहां के पुलिस, डॉक्टर, सभी कर्मचारियों ने खुद की जान जोखिम में डालकर अपना फर्ज निभाया है। इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि बीएमसी ने कोरोना के प्रसार रोकने के अलावा भी मानसून के दिनों में मुंबई का जनजीवन प्रभावित ना हो इसके लिए नाले नालियों की सफाई करवाई और पेड़ों की काट-छाँट भी करवाई। उम्मीद करती हूं कि आने वाले समय में कोरोना पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा और हम सभी फिर से स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी जिएंगे।

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