क्षेत्रीय मुद्दे बदल सकते हैं महाराष्ट्र का चुनावी समीकरण

साभार/ मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly election) के जरिए सत्ता के शिखर पर पहुंचने के लिए सभी पार्टियां जोर-शोर से जुटी हैं। बड़े नेता मैराथन चुनाव प्रचार में जुटे हैं तो कार्यकर्ता घर-घर तक पहुंचकर लोगों को अपनी पार्टी से जोड़ने की कवायद में। इन चुनावों में क्षेत्रीय मुद्दे हावी हैं और कई सीटों पर ये पूरी तरह से तस्वीर बदल सकते हैं। कई क्षेत्रों में बीजेपी और कांग्रेस के सामने अपने गढ़ बचाने की चुनौती है तो कहीं दूसरे के गढ़ में सेंधमारी की कोशिश। आइए, एक नजर डालते हैं अहम मुद्दों और क्षेत्रवार सीटों की राजनीति पर…

नॉर्थ महाराष्ट्र
कुल सीटें- 47
ये हैं अहम मुद्दे- कृषि संकट, प्याज की कीमतें गिरना, सूखा और वन अधिकार कानून
क्षेत्र की राजनीति- कभी कांग्रेस का गढ़ रहे नॉर्थ महाराष्ट्र में अब बीजेपी का कब्जा दिखता है। इस बार भी इस क्षेत्र में कांग्रेस के लिए चुनौती कम नहीं है। यह इसलिए भी है कि कांग्रेस के कई दिग्गज नेता जिसमें पूर्व मंत्री अमरीश पटेल और माणिकराव गावित शामिल हैं, बीजेपी में जा चुके हैं।
मुख्य उम्मीदवार: यहां मुख्य उम्मीदवार के रूप में मुक्ताईनगर सीट से रोहिणी खडसे और येवला सीट से छगन भुजबल हैं।

विदर्भ
कुल सीटें- 62
अहम मुद्दे- किसानों की आत्महत्या, जाति और सिंचाई परियोजनाएं
क्षेत्र की राजनीति- विदर्भ क्षेत्र भी कांग्रेस का गढ़ रहा है। पर, यह गढ़ भी अब कांग्रेस से खिसकता दिख रहा है। 2014 के चुनाव में बीजेपी क्षेत्र की 62 में से 44 सीटें जीतीं। पिछली बार यहां से कांग्रेस ने 10 सीटें जीती थीं। इस बार बीजेपी कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने की कवायद में जुटी है।
मुख्य कैंडिडेट- नागपुर साउथ वेस्ट से सीएम देवेंद्र फडणवीस, बल्लारपुर से सुधीर मुनगंटीवार और साकोली से नाना पटोले

मराठवाड़ा
कुल सीटें- 46
अहम मुद्दे- पानी की कमी, कृषि संकट और नौकरियों की कमी
क्षेत्र की राजनीति- सूखा प्रभावित क्षेत्र है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में काफी बारिश हुई है। यह क्षेत्र एक बड़ी मुस्लिम आबादी भी है। औरंगाबाद से लोकसभा चुनावों में AIMIM पार्टी से सांसद चुने गए। पिछले चुनावों के दौरान कांग्रेस ने 9 और एनसीपी ने 8 सीटें जीती थीं। इस बार बीजेपी और शिवसेना यहां बेहतर प्रदर्शन की आस में हैं।
मुख्य कैंडिडेट- अशोक चव्हाण बोकर सीट से, पूर्व सीएम विलासराव देशमुख के बेटे अतुल (लातूर शहरी सीट)और धीरज (लातूर ग्रामीण सीट) भी मैदान में हैं।

पश्चिमी महाराष्ट्र
कुल सीटें- 58
मुख्य मुद्दे- कोल्हापुर, सांगली, सतारा और पुणे में बाढ़ पीड़ितों को समय पर राहत की कमी। आर्थिक मंदी, और उद्योगों का बंद होना
क्षेत्र की राजनीति- चीनी बेल्ट। एनसीपी इस बेल्ट में काफी मजबूत है। सालों से चीनी सहकारी समितियों को चलाने वाले स्थानीय नेताओं के माध्यम से यहां की राजनीति को नियंत्रित किया गया। 2019 के लोकसभा चुनावों में एनसीपी ने जिन चार संसदीय सीटों पर जीत दर्ज की, वे इसी क्षेत्र से हैं। शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को खत्म करने या बेअसर करने के लिए बीजेपी इस बार इस क्षेत्र में जोर दे रही है। इसीलिए बीजेपी ने कांग्रेस और एनसीपी के कई मराठा नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा है।
मुख्य कैंडिडेट- कर्जत जामखेड से रोहित पवार, संगमनेर से महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रमुख बालासाहेब थोराट, काराद से पृथ्वीराज चव्हाण और सोलापुर से प्रणति शिंदे।

कोंकण
कुल सीटें- 75 सीटें
मुख्य मुद्दे: आरे कॉलोनी लड़ाई, पीएमसी बैंक घोटाला और आर्थिक मंदी।
क्षेत्र की राजनीति- कोंकण में रायगढ़, रत्नागिरी और मुंबई महानगरीय क्षेत्र शामिल है। यहां बीजेपी और शिवसेना की नजर बड़ी जीत पर है। सबसे अधिक सीटें भी इसी क्षेत्र में हैं। 3 लाख करोड़ की नानार रिफाइनरी जो रत्नागिरी में बनाई जानी थी, एक चुनावी मुद्दा है। कांग्रेस और एनसीपी खराब बुनियादी ढांचे के आरोपों के साथ बीजेपी और शिवसेना को हराने के लिए पीएमसी बैंक घोटाले को मुख्य मुद्दा बना रही हैं। उत्तर भारतीय और मराठी मतदाताओं के कारण मुंबई और ठाणे में बीजेपी लाभ में है।
मुख्य कैंडिडेट- वर्ली से आदित्य ठाकरे, नालासोपारा से प्रदीप शर्मा, बांद्रा पश्चिम से मुंबई बीजेपी के पूर्व प्रमुख आशीष शेलार, श्रीवर्धन से एनसीपी नेता सुनील तटकरे की बेटी अदिति तटकरे।

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