मुंबई। भारतीय रेलवे की नाकामी एक बार फिर यात्रियों के लिए मुसीबत बनी है। मुंबई-करमाली के बीच 24 मई 2017 से शुरू हुई तेजस एक्सप्रेस में फूड पॉयजनिंग से 24 यात्री बीमार हैं, जिनमें 3 यात्री आईसीयू में हैं। खबर के मुताबिक रविवार को इस ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को नाश्ता करने के बाद उल्टियां होने लगीं। फूड-पॉयजनिंग की शिकायत मिलने के बाद रेलवे ने 24 यात्रियों को चिपलून के पास लाइफ केयर अस्पताल में भर्ती कराया। इस ट्रेन में आईआरसीटीसी केटरिंग की सेवा देती है। इस घटना को खानपान सेवा निदेशक मॉनिटर कर रहे हैं।
आईआरसीटीसी के प्रवक्ता पिनाकिन मोरावाला के अनुसार, ‘हमारा गोवा में कोई बेस किचन नहीं है इसलिए इस ट्रेन की केटरिंग सेवा आउटसोर्स की गई है। यात्रियों को सुबह नाश्ते में उपमा, ऑमलेट, सैंडविच और जूस दिया गया था।’ 992 यात्री क्षमता वाली इस ट्रेन में 292 यात्री सफर कर रहे थे। इनमें से 220 को सुबह नाश्ता परोसा गया था।
तेजस एक्सप्रेस शुरू होने पर इस ट्रेन में केटरिंग सर्विस को लेकर तमाम दावे किए जा रहे थे। पूर्व रेलमंत्री के क्षेत्र में चलने वाली इस प्रीमियम ट्रेन में केटरिंग के लिए खास मेन्यू तैयार करने पर का प्रचार किया जा रहा था और यात्रियों से अच्छा खासा केटरिंग चार्ज भी लिया जा रहा है।
एग्जिक्युटिव क्लास में केटरिंग के लिए यात्रियों को अतिरिक्त 504 रुपये और एसी चेयरकार में 410 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मुंबई से करमाली जाते वक्त इस ट्रेन में पंजाबी घसीटाराम हलवाई द्वारा केटरिंग सर्विस दी जाती है। वापसी में जे.के.घोष नाम की कंपनी सेवा प्रदान करती है।
केटरिंग पॉलिसी 2017 के पैरा 3.8.4 में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि आईआरसीटीसी खानपान की सेवा के लिए निजी कंपनियों को आउटसोर्स नहीं करेगी। सूचना के अधिकार के तहत जुटाई गई जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी देशभर में 5 बेस किचन संभाल रही है। इनमें से मुंबई समेत तीन आउटसोर्स किए हुए हैं।
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