वाराणसी से अजय राय देंगे पीएम मोदी को चुनौती

साभार/ नई दिल्ली। वाराणसी लोकसभा सीट पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी के चुनाव मैदान में उतरने के कयासों पर कांग्रेस ने ब्रेक लगा दिया है। कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से अजय राय को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने 2014 में भी अजय राय को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वो अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे। एक बार फिर कांग्रेस ने उन्हीं पर दांव खेला है।

अजय राय वाराणसी सीट से विधायक रहे चुके हैं। अजय राय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1996 में बीजेपी प्रत्याशी के रूप में उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़कर की थी, जिसमें उन्‍हें विजय प्राप्‍त हुई थी। इसके बाद अजय राय ने सपा में शामिल हो गए थे। सपा के 2009 में लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं सके थे। इसके बाद वो कांग्रेस में शामिल हो और 2012 में विधायक बने।

इसके बाद 2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताल ठोका था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी को बाहरी (बनारस से बाहर का) और अरविंद केजरीवाल को भगोड़ा करार दिया था। लेकिन उनका ये दांव काम नहीं आया। उन्हें महज 75 हजार वोट ही मिल सके थे।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पिछले दिनों पूर्वांचल के लिए लोकसभा चुनाव अभियान का पहला दौरा प्रयागराज से वाराणसी का किया था इस दौरान वो गंगा नदी में बोट के सहारे पहुंचीं। रास्ते में वो मंदिर और मजार पर माथा टेकते हुए और गंगा के दोनों किनारे बसे हुए लोगों से संवाद करते हुए काशी पहुंचीं थी।

प्रियंका ने जिस तरह से वाराणसी में सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी को लेकर घेरा और सवाल खड़े किए हैं। इसके बाद से कायास लगाया जा रहा था कि मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी चुनावी मैदान में उतर सकती है। इतना ही नहीं प्रियंका ने खुद भी रायबरेली में लोगों से कहा था कि वाराणसी से लड़ जाऊं तो। इसके बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस प्रियंका को उतार सकती है, लेकिन पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार प्रियंका के वाराणसी से उतरने पर पूर्ण विराम लगा दिया था।

वाराणसी लोकसभा सीट पर सातवें चरण में वोट डाले जाएंगे। यहां के जातीय समीकरण को देखें तो ब्राह्मण, वैश्य और कुर्मी मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं। करीब तीन लाख वैश्य, ढाई लाख कुर्मी, ढाई लाख ब्राह्मण, तीन लाख मुस्लिम, 1 लाख 30 हजार भूमिहार, 1 लाख राजपूत, पौने दो लाख यादव, 80 हजार चौरसिया, एक लाख दलित और एक लाख के करीब अन्य ओबीसी मतदाता हैं।

 


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