विजय कुमार साव/ गोमियां (बोकारो)। गोमियां (Gomia) प्रखंड के हद में होसिर स्थित सुभाष चौक में लगे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति आज अपने ही सम्मान के लिए किसी रहनुमा की बाट जोह रहा है। ना जाने कितने राजनीतिक दलों के नेता, समाजसेवी प्रतिदिन इस रास्ते से गुजरते हैं। मगर शायद उनकी नजर इस प्रतिमा पर पड़ती हो।
जानकारी के अनुसार इस महापुरुष की मूर्ति के पीछे गंदगी का अंबार लगा है। धूप और बरसात सभी मौसम में खुले आसमान में रहने के कारण इस प्रतिमा का रंग मलिन होने लगा है।
प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 ईस्वी में तब के बंग प्रांत के ओडिशा के कटक शहर में हुआ था। नेताजी की माता प्रभावती और पिता जानकी नाथ बोस थे।
नेताजी का परिवार बहुत ही संपन्न था। वे सिविल सर्विस में चौथा स्थान प्राप्त करने वाले व्यक्ति थे। मगर नेताजी पर देश को आजाद करने का शगल ऐसा था कि आजादी की क्रांति में कूद पड़े और आजाद हिंद फौज की स्थापना की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जो अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था।
इन्होंने ही पहली बार तिरंगे झंडे को अंडमान निकोबार मे फहराया था। तब यह तय हुआ था कि एक दूसरे से मिलने पर लोग एक-दूसरे को जय हिंद कहेंगे। मगर जब इन्हें अंग्रेजी हुकूमत द्वारा बंदी बना लिया गया था और जब नेताजी नजरबंद हालत में अंग्रेजो की आंखो में धुल झोककर भारत से चले गए उस समय 18 अगस्त 1945 को टोक्यो जाते समय ताइवान के जंगलों में उनका प्लेन क्रैश हो गया और उनकी मृत्यु हो गई।
आज तक उनका शव प्राप्त नहीं हुआ जो आज भी विवाद का विषय बना हुआ है। इन्होंने 1937 में ऑस्ट्रियन युवती से विवाह किया था। उन दोनों की एक बेटी है जो आज जर्मनी में सपरिवार रहते हैं। विडंबना यह है कि आज भी लोग विकास की बातें करते हैं, लेकिन उनकी प्रतिमा के ऊपर ध्यान नहीं जाता और साल में लोग दो बार हीं याद करते हैं।
एक 15 अगस्त दूसरा इनकी जयंती पर। इस संबंध में गोमियां क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा नेता देवनारायण प्रजापति से पूछे जाने पर कहा की जिसने नेताजी की मूर्ति स्थापित की है वो रख रखाव करने से रोकते हैं। जिस कारण चाहकर भी वे कुछ नहीं कर पाते। आजसू के केंद्रीय सचिव राजेश विश्वकर्मा ने कहा कि यथासंभव कोरोना काल के बाद सांसद या विधायक मद से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति का सुंदरीकरण कार्य कराया जायेगा।
![]()











