पत्रकार हितों को लेकर मंथन

  • अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति झारखंड इकाई की ऑनलाइन बैठक में पत्रकार हितों को लेकर मंथन

  • झूठा मुकदमा वापस लेकर पत्रकारों को कोरोना वारियर्स सम्मान देने की मांग

एस.पी.सक्सेना/ रांची (झारखंड)। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (Akhil Bhartiya Patrakar Suraksha Samiti) के झारखंड प्रदेश इकाई की जूम एप पर 16 जून को ऑनलाइन बैठक में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने एवं कोरोना काल में पत्रकारों के साथ दमनात्मक कार्रवाई को लेकर गहन मंथन किया गया। बैठक में रांची, लोहरदगा, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, बोकारो, साहेबगंज, सिमडेगा, देवघर आदि कई जिलों समेत प्रदेश पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।

प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश तिवारी की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में सभी ने संगठन के मूल मंत्र ‘ पत्रकार सुरक्षा कानून ‘ लागू कराने, संगठन के सशक्तिकरण, फेसबुक, ट्विटर एवं सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन के क्रियाकलापो को शहर से मुफ्फसिल तक के साथियो को जोड़ने, सदस्यता अभियान शीघ्र पूरा करने जैसे मुद्दों पर आम सहमति बनी। बैठक में वैश्विक महामारी कोरोना त्रासदी में पत्रकारों के दयनीय हालात पर चर्चा हुई। सरकार से मांग की गई कि कोरोना काल मे समाचार संकलन को लेकर पत्रकारों पर किए गए फर्जी मुकदमे शीघ्र वापस लिए जाए। पत्रकारों के प्रति सरकारी तंत्र के दमनात्मक कार्रवाई की तीव्र भर्त्सना की गई।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश तिवारी ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल से पूरी दुनियां में हाहाकार मचा हुआ है। संक्रमण काल के दौरान चिकित्सक, पुलिसकर्मी, पत्रकार साथी अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर अपनी जान दांव पर लगाकर जनसेवा का कार्य कर रहे हैं। जिनमें सबसे ज्यादा जोखिम पत्रकारों को उठाना पड़ रहा है। संस्थानों से मामूली मानदेय पाने वाले पत्रकारों के घरों में फांके पड़ रहे हैं। बावजूद इसके पत्रकारों को निशाने में लेकर उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कर प्रताड़ित करना अत्यंत निंदनीय कृत्य है।

बैठक के दौरान अनुभवी व चर्चित पत्रकार विनोद दुआ के उपर कायम मुकदमों को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। समिति ने विनोद दुआ पर दर्ज फर्जी मुकदमें को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन चलाने की चेतावनी दी। कहा कि केंद्र सरकार को देश के सभी पत्रकारों को कोरोना वारियर्स घोषित कर सम्मानित करना चाहिए। संथाल परगना प्रमंडल अध्यक्ष डॉ सुनील कु गुप्ता ने पत्रकार सुरक्षा विधेयक बिल को पास कराने पर जोर देते हुए कहा कि जब तक देश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं होगा पत्रकारों का इसी तरह उत्पीड़न होता रहेगा। पत्रकारों को सुरक्षा देने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।

समिति का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति संकल्पित होकर सम्पूर्ण झारखंड में सुरक्षा कानून को लागू कराने के लिए जनजागरण अभियान चलायेगी। इसके लिए संगठन लगातार प्रयासरत है और सम्पूर्ण भारत में इसके लिए संघर्षरत भी है। इसी के साथ कई राज्यों में संगठन ने कानून का ड्राफ्ट तैयार किया था। उसे सरकार को सौंप दिया गया है और इस पर सरकार से विस्तार पर चर्चा भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगातार खबर संकलन के दौरान पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने या शासकीय कार्य बाधा डालने को लेकर उन पर जो अपराध दर्ज किया जा रहा है,वह अशोभनीय है।

लोहरदगा के पत्रकार आनंद कु सोनी ने कहा कि कोरोना काल में छोटे बड़े सभी पत्रकारों के खिलाफ़ सच उजागर के कारण की गई कानूनी कारवाई निंदनीय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हो रहे प्रहार यह साबित करता है कि वर्तमान समय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अघोषित आपातकाल लगा दिया गया है। गिरिडीह के पत्रकार अशोक सिंह ने पत्रकारों के ऊपर बढ़ रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारों को एक जुट होकर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने के लिए जिम्मेदार सरकार को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराना चाहिए। अब तक तमाम सरकारों ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाये हैं। यदि सरकार पत्रकारों की समस्या को नज़रंदाज़ ऐसे ही करती रही तो पूरे राज्य में समिति उग्र आंदोलन को बाध्य होगा। बैठक में इंदु शेखर, समशेर अली, प्रीतम पांडेय, भरत मंडल, इन्द्र देव प्रसाद आदि ने सुझाव दिया। जिसे विषयसूची में सर्वसम्मति से सहमति के साथ स्वीकार किया गया।

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