एस.पी.सक्सेना/ धनबाद (झारखंड)। झारखंड राज्य के बड़े अस्पतालों में से एक पीएमसीएच धनबाद के प्रसूति विभाग में इन दिनों मरीजों के साथ सेकेंड क्लास और थर्ड क्लास का ट्रीटमेंट हो रहा है। इलाज के लिए आनेवाली गर्भवती महिलाओं को प्रसूति विभाग की दो जगहों पर बेड दिया जाता हैं। कुछ प्रसूति महिलाओं को वार्ड के अंदर बेड मिलता है तो वहीं कई महिलाओं को कमरे के बाहर ही थर्ड क्लास स्थिति में बेड पर जगह दे दी जाती है। अस्पताल द्वारा कहा जाता है कि अभी अंदर कमरे में बेड खाली नहीं है। विभाग में 10 से 15 बेड लगे हुए हैं।
करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल के विकास के नाम पर सरकार लगातार करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। सरकारी स्तर पर सुविधा के नाम पर प्रति बर्ष साल लाखो की राशि खर्च किया जाता है। सरकार द्वारा व्यवस्था सुधारने के तरह-तरह के दावे किये जाते हैं। प्रबंधन को कड़े और बड़े-बड़े दिशा-निर्देश दिये जाते हैं।बावजूद स्थिति सुधरने का नाम ही नही लेती है। अस्पताल परिसर में सडांध व् बदबू के कारण मरीजो तथा परिजनों को मुंह पर रुमाल रख कर रहना पड़ता है।
आसपास से गुजरने में भी भारी बदबू का सामना करना पड़ता है। हाल यह है कि जगह जगह गुटखा, पान की पीक हर तरफ कोने में भरा हुआ। दवाओं और इन्जेक्शन के वेस्टज भी इधर-उधर बिखरे पड़े हैं। गंदगी की वजह से यहां मच्छर और मक्खियों की भरमार है। इससे कई अनचाही बीमारियों के पनपने का खतरा लगातार बना रहता है। इस बाबत अस्पताल के चिकित्सको तथा कर्मचारियों ने बताया गया कि दिन में दो बार परिसर की सफाई होती है। बाहर लगे बेड मरीजों के लिए नहीं बल्कि उनके साथ आनेवाले परिजनों के लिए हैं। आगंतुक मरीज और उनके परिजन गंदगी फैला कर अस्पताल को दूषित कर देते हैं।
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