एस.पी.सक्सेना/ बोकारोः झारखंड में शिक्षा और भोजन का अभाव है। सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। मेरी सोंच है कि दुनियां में रहना है तो काम कर प्यारे। उक्त बातें जैन धर्म के प्रचारक धर्म माता सती मां ने अपने बोकारो दौरे के क्रम में पेटरवार स्थित जगजीवन जी महाराज चक्षु चिकित्सालय में जगत प्रहरी से विशेष भेंट में कही।
75 वर्षीया सती मां के अनुसार उन्होंने 52 वर्ष की आयु में जैन धर्म की दिक्षा लेकर भगवान महावीर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया, इसके बाद से देश में भ्रमण कर रही हुं। सती मां के अनुसार उनका बचपन मुंबई के वसई में बिता।
कालांतर में उन्होंने जैन धर्म की दिक्षा लेकर घाटकोपर तथा कांदिवली के जैन मंदिर में रहकर चौमासा की। सती मां ने बताया की वे भगवान महावीर की जन्मस्थली बिहार राज्य के वैशाली स्थित जन्मस्थली का भ्रमण भी कर चुकी हुं। उनके अनुसार लोगों ने भगवान महावीर के घर को अस्त व्यस्त कर दिया है। वहां के लोगों को तथा बिहार सरकार को चाहिए की भगवान महावीर के घर व गांव के विकास के लिए कोई ठोस कदम उठाए।
सती मां के अनुसार झारखंड में शिक्षा और भोजन का भारी अभाव है। यहां के बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर हैं। सरकार यदि ध्यान दे तो ऐसे बच्चे भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकते हैं। सती मां के अनुसार संन्यास शांति के लिए जरूरी है।
हाल के दिनों में पूरे देश में अशांत है। उन्होंने वर्तमान सरकार के द्वारा लागू किया गया एनआरसी तथा सीएए को सही बताते हुए कहा कि हमारे देश में अतिथियों का स्वागत किया जाता है, लेकिन चुप्पा-चोरी घर में घुसकर रहने वाले अतिथि नहीं हो सकते हैं।
घर में आया अतिथि तीन दिन का होता है सब दिन का नहीं। उन्होंने कहा की भगवान महावीर का संदेश है जीओ और जीने दो। आच्हसा परमो धर्म। किसी को इस भौतिक संसार से कुछ भी लेकर नहीं जाना है। इसलिए सरल जीवन जीओ। सती मां ने बताया कि उनके पुत्र नम्र मुनि जी महाराज पैदल पूरे देश में स्थित जैन मंदिरों का भ्रमण करते हुए अगले महीने जनवरी 2020 में पेटरवार आएंगे और यहां मुख्य कार्यक्रम करेंगे।
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