हजारीबाग एसपी के सहयोग से वृद्धा को मिला इंसाफ
विशेष संवाददाता/ बोकारो (झारखंड)। विभिन्न कारणों से पूरे देश में पुलिसवालों की छवि पर सवाल उठते रहते हैं। लेकिन हजारीबाग (Hazaribagh) के एस पी मयूर पटेल ने करीब 75 वर्षिय विधवा महिला को न्याय दिला कर अनोखा मिसाल कायम किया है। उन्होंने यह साबित कर दिया की सभी पुलिस वाले एक जैसे नही होते। वहीं प्रशासन द्वारा हड़पी गई पुरखों की जमीन वापस मिलने से विधवा शकुंतला देवी जैन को जीने का सहारा मिल गया है।
गौरतलब है की हजारीबाग के आईपीएस एस पी मयूर पटेल ने एक तीर से दो शिकार किया है। उन्होंने न्याय दिलाने के साथ-साथ पुलिस की धूमिल छवि पर पर्दा डालने की कोशिश की है। करीब दो दशक से चल रहे टाल म टोल की प्रतिक्रिया को उन्होंने महज एक झटके में पटरी पर ला दिया है। आईपीएस के इस कारनामे की चर्चा हजारीबाग, गिरिडीह के अलावा बोकारो जिला में चल रही है।
पुलिस के प्रति लोगों का नजरिया बदला
मिली जानकारी के अनुसार हजारीबाग निवासी शकुंतला देवी जैन द्वारा 1984 में अपने पुरखों की खाली जमीन को प्रशासन के आग्रह पर थाना बनाने के लिए किराये पर दिया था। एनएच 33 (नेशनल हाईवे) जो रामगढ़ (Ramgarh) जिला से हजारीबाग आता है। इसी हाईवे पर हजारीबाग मुफ्फसिल थाना स्थित है। तय मसौदा के अनुसार एक से दो कमरों की पुलिस चौकी की जगह दी गई थी। जिसका किराया दो हजार रूपये तय किया गया था। बता दें कि यहां शकुंतला देवी का कुल 2 एकड़ जमीन है। 1984 में थाना स्थापित होने के बाद पुलिस वालों ने इस जमीन पर अतिक्रमण कर धीरे-धीरे एक दो कमरों के बजाय पूरी जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। बात यहीं खत्म नही हुई पुलिस प्रशासन द्वारा तय रकम को अदा करने में भी आना कानी करने लगे। शकुंतला देवी की बाकी जमीन पर पुलिस द्वारा जब्ती का माल और वाहनों को बेतरतीब छोड़ देने से पूरा जमीन अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया।
इस तरह विधवा की दो एकड़ जमीन पर अतिक्रमण कर उसे इस्तेमाल करती रही। पुलिस की ज्यादती से तंग आकर 75 वर्षीय विधवा महिला ने अदालत की राह पकड़ी, लेकिन आईपीएस मयूर पटेल की अध्यक्षता में विधवा को न्याय मिल ही गया। इस कड़ी में दिलचस्प बात यह है की 1984 से अब तक जीतने भी थाना प्रभारी आये किसी ने वृद्ध महिला की गुहार नहीं सुनी, यहां यह बताना जरूरी है की सभी ने इस मुफ्फसिल थाने को कमाई का बेहतर जरिया समझा। क्योंकि इसी रास्ते से कोयले की काला बाजारी होती है। पिछले कई वर्षों से वृद्ध महिला अपने जमीन को हासिल करने के लिए दर्जनों आवेदन मुफस्सिल थाना व संबंधित विभागों को दिया लेकिन उस पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। हजारीबाग के मौजूदा एसपी ने इस मामले को सुलझाते हुए पुलिस के प्रति लोगो का विश्वास जीतने की कोशिश की है।
सूत्रों की माने तो मुफ्फसिल थाना में आने वाले अधिकारी और कर्मचारियों की बल्ले बल्ले हो जाती है। यहां के पुलिस वाले लाखों कमाते हैं, लेकिन किसी ने वृद्ध महिला की गुहार नहीं सुनी। बता दें कि इस पूरी प्रक्रिया में एसपी पटेल की सराहनीय भूमिका रही है। उल्लेखनीय है की हजारीबाग एसपी मयूर पटेल ने मुफ्फसिल थाना को शिफ्ट करने का आदेश दे दिया है। जबकि थाना प्रभारी का कहना है कि हमें कोई ऐसा आदेश नहीं मिला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा की थाना प्रभारी इसे कैसे रोकते हैं।
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