विजय कुमार साव/ गोमियां (बोकारो)। झारखंड में औद्योगिक जिला का एकमात्र रूतबा रखनेवाले बोकारो जिले में कोयला व लोहे की प्रचुरता ने आर्थिक अपराधियों के लिए शुरू से ही संभावनाएं बना रखी हैं। ये आर्थिक अपराधी न केवल सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को लूटकर क्षति पहुंचा रहे हैं बल्कि गुंडई व रंगदारी की एक नयी संस्कृति भी पैदा कर रहे हैं। आर्थिक अपराधियों की यह चाल पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गयी है। पुलिस अब ऐसे अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में लग गयी है। यह अलग बात है कि रंगदारो की इस नयी पौध को कई लोगों का आर्शीवाद प्राप्त है। खासकर सीसीएल प्रबंधन के भी भ्रष्ट लोगों का समर्थन प्राप्त है। इसके एवज में सबको रंगदारी का एक तय हिस्सा समय से पहुंच जाता है।
आप जानकर चौंक जायेंगे की बेरमो कोयलाचंल (Bermo Koylanchal) के सीसीएल के लोकल सेल प्वाईंटों पर रंगदारों का कब्जा है। आप कोयला कारोबारी हैं और आपने इस कारोबार मे पैसा लगाया है तो कायदे से सी सी एल प्रबंधन को चाहिए कि वह कांटा घर से आपकी ट्रक को इन्ट्री कराये और कोयला लादकर उसे गंतव्य के लिए रवाना कर दे। लेकिन सीसीएल ने अपने लोकल सेल प्वाईंटों को रंगदारों के हवाले कर दिया है। इसके लिए विधिवत गुपचुप समझौता किया गया है। स्थानीयता के नाम पर कमेटी बनाकर रंगदार रंगदारी कर रहे हैं और प्रति ट्रक रू 3450/= की वसूली कर रहे हैं। बेरोक टोक यह धंधा चल रहा है और बैठे -बैठे ही रंगदार कमेटी बनाकर वसूली कर रहे हैं।
मतलब साफ रंगदारी वसूल कर सबको हिस्सा ईमानदारी से पहुंचा देते हैं। इसमें सबको बंधा बंधाया हिस्सा है। सब चुप रहकर रंगदारों को मौन समर्थन देते रहते हैं। अगर किसी ने विरोध किया तो हर वह हथकंडा अपनाया जाता है कि विरोध करनेवाला तबाह होकर नतमस्तक हो जाए या फिर अपना कारोबार समेट कर पलायन कर जाए। कहा जाता है कि यहां कारेाबार करनेवाले व्यापारी कभी भी जजिया टैक्स से मुक्त नहीं रहे हैं। रंगदारो की इस नयी टोली ने अपना काम खुल्लम खुल्ला शुरू कर दिया। हालांकि एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हुए हैं और शिकायत प्रशासन के आला अधिकारियों तक पहुंची हैं।
यह गिरोह रंगदारी ही नहीं वसूलता बल्कि यह तय करता है कि कोयले के लोकल सेल में किस ट्रक की एंट्री मिलेगी और कोयले का क्या रेट होगा। अगर कमेटी नहीं चाही तो भले ही आप नेशनल परमिट के साथ ट्रक का परिचालन कर रहे हों आपके ट्रक को कोयला लोड करने की इजाजत नहीं होगी। ऐसी ही व्यवस्था सी सी एल (CCL) के स्वांग गोविन्दपुर लोकल सेल में है। कमेटी की रंगदारी ट्रक मालिकों में खौफ पैदा करती है और उनके पास रहता है केवल रंगदारी चुकाकर अपना कारोबार करने की मजबूरी। सबका हिस्सा रंगदारी की राशि में तय है। इसलिये कोई रंगदारों पर नकेल कसना नहीं चाहता। मतलब साफ है कोई भला अपनी कमायी पर लात मारना चाहेगा ही क्यों। अब मामला पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के पास पहुंच गया है और इस बात का भी प्रमाण पहुंच गया है कि किसे कितना हिस्सा मिलता है। पुलिस प्रशासन ने अपनी ओर से काररवाई करने का भरोसा दिया है।
कमेटी के नाम पर सक्रिय रंगदार ट्रक मालिकों, कोयले के कारोबारियों के लिए तबाही का कारण बने हुए हैं। चूंकि इन इलाकों में कानून का राज नहीं बल्कि रंगदारों का राज चलता है। इसलिये कमेटी के नाम पर रंगदारी चढ़ाना और रंगदारों को सलामी बजाना कोयले के कारोबारियों व ट्रक मालिकों की अनचाही मजबूरी बनी हुई है। कोयला में सबके हाथ काले हैं। इसलिये अगर विरोध के स्वर उठते हैं तो उसे दबाने के लिए सभी महकमा रंगदारों के पक्ष में खड़ा हो जाता है और तब ऐन-केन-प्रकारेन विरोध के स्वर कुचल दिए जाते हैं। मतलब साफ है कि यह खेल चलता रहे। इस सम्बन्ध मे स्वांग गोमिया निवासी कोपेश्वर यादव ने स्वांग कांटा में वसूले जा रहे रंगदारी का विरोध करते हुए, बोकारो उपयुक्त, पुलिस कप्तान सहित पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह को लिखित आवेदन दे कर शिकायत की है और इस रंगदारी को खत्म करने के साथ साथ जान माल की सुरक्षा की मांग किया है। वहीं बोकारो के पुलिस कप्तान चंदन झा ने इस संबंध में कहा कि आर्थिक अपराध सबसे बड़ा अपराध है। आप लोगों के द्वारा इसकी जानकारी मिली है। इसकी जांच वे स्वयं करेंगे और दोषी पर करवाई होगी।
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