मुश्ताक खान/ मुंबई/ बगोदर (झारखंड)। वर्ष 2017 से लापता अंशु कुमार पिता अर्जुन विश्वकर्मा का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। 31 दिसंबर 2017 से लापता अंशु की तलाश अब भी जारी है। हालांकि उसके परिजनों ने अपने सभी रिश्तेदारों के अलावा हर संभावित ठिकानों की खाक छानी है। करीब एक साल बाद भी अंशु का कोई सुराग न मिलता देख उसके चचेरे भाई मनीष कुमार ने बगोदर थाना में लिखित शिकायत की है। उक्त शिकायत की तहरीर में अंशु कुमार के चचेरे भाई ने संभावना जताई है कि उसके भाई का किसी ने अपहृरण कर लिया है। जिसे बगोदर पुलिस ढूंढने में नाकाम साबित हो रही है।
मिली जानकारी के अनुसार करीब एक साल से लापता महज 16 साल के नाबालिग अंशु कुमार की एक 18 साल की बड़ी बहन भी है। झारखंडी एकता संघ (जेईएस) के राष्ट्रीय संगठन सचिव विजय प्रसाद ने बताया कि अंशु कुमार के जन्म लेने के डेढ़ माह बाद उसकी माता का निधन हो गया। इसके बाद उसके पिता अर्जुन विश्वकर्मा ने दूसरी शादी रचा ली। ऐसे में इन दोनों भाई बहनों का पालन पोषण उसके चचेरे भाई मनीष कुमार पिता भरत विश्वकर्मा, ग्राम थाना बगोदर, जिला गिरिडिह द्वारा किया जा रहा है। बगोदर थाना में दी गई तहरीर के अनुसार 31 दिसंबर 2017 की सुबह करीब 8 बजे अंशु कुमार घरेलु काम से बगोदर बाजार गया था।
लेकिन वह आज तक लौट कर नहीं आया। इस संबंध में बगोदर थाना में दैनिकी संख्या 20/18 दिनांक 1 जनवरी 2018 के तहत मामला दर्ज कराई गई थी। यहां मनीष कुमार ने संभावना जताई थी की उसके चचेरे भाई का अपहृरण किया गया है। इस बात पुष्ठी जेईएस के राष्ट्रीय संगठन सचिव विजय प्रसाद ने बगोदर थाना प्रभारी पृथ्वी सेन से करने के बाद जगत प्रहरी से बातचीत के दौरान बताया। अब यहां सवाल यह उठता है कि बगोदर पुलिस अंशु कुमार को ढूंढने में लापरवाही बरत रही है या….?
गौरतलब है कि करीब एक साल से लापता नाबालिग अंशु कुमार को बगोदर पुलिस ढूंढने में नाकाम है या लापरवाहियों के कारण उसकी फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है? अंशु कुमार की इकलौती बहन संध्या कुमारी हर रोज अपने भाई के आने का इंतजार करती है। इस तरह करीब एक साल से भाई का इंतजार करते -करते उसकी आंखे पथरा गई है।
572 total views, 1 views today