साभार/ नई दिल्ली। अयोध्या मामले पर मध्यस्थता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस विवाद को मध्यस्थता और बातचीत के जरिए तय किया जाएगा। मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष जस्टिस खलीफुल्ला होंगे और पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाएगी। मध्यस्थों में श्री श्री रविशंकर भी शामिल होंगे। इसके अलावा वरिष्ठ वकील श्री राम पंचू होंगे।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मध्यस्थता की कार्रवाई पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और इसकी मीडिया रिपोर्टिंग नहीं की जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले में क्या प्रगति रही इसकी रिपोर्ट 8 हफ्ते में दी जाए। इसके साथ ही मध्यस्थता के लिए बातचीत फैजाबाद में होगी। इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर फैसला सुरक्षित रख लिया था कि अयोध्या विवाद को मध्यस्थ के पास भेजा जा सकता है या नहीं।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बुधवार को इस मुद्दे पर विभन्न पक्षों को सुना था। पीठ ने कहा था कि इस भूमि विवाद को मध्यस्थता के लिए सौंपने या नहीं सौंपने के बारे में बाद में आदेश दिया जायेगा। इस प्रकरण में निर्मोही अखाड़ा के अलावा अन्य हिन्दू संगठनों ने इस विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजने के शीर्ष अदालत के सुझाव का विरोध किया था, जबकि मुस्लिम संगठनों ने इस विचार का समर्थन किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद 2.77 एकड़ भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपील पर सुनवाई के दौरान मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया था।
कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई फिलहाल दस्तावेजों के अनुवाद पर हुए विवाद के चलते अटकी है। कोर्ट ने सभी पक्षों को यूपी सरकार की तरफ से करवाए गए अनुवाद को देख कर अपनी सहमति बताने को कहा है। इसमें करीब 8 हफ्ते का वक्त लगना है। सुनवाई कर रही 5 जजों की संविधान पीठ का विचार था कि इस समय का इस्तेमाल बातचीत के ज़रिए किसी समाधान तक पहुंचने के लिए हो। बुधवार को मामले पर आदेश सुरक्षित रखते वक्त कोर्ट ने पक्षकारों से कहा था कि वो चाहें तो मध्यस्थों के नाम पर सुझाव दे सकते हैं. कुछ पक्षकारों ने सुझाव दिए भी। लेकिन नाम कोर्ट ने तय किए हैं।
जस्टिस एफ एम आई कलीफुल्ला
2016 में रिटायर हुए सुप्रीम कोर्ट के जज फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला एक विद्वान और ईमानदार जज की रही है। BCCI मामले में उनके योगदान की तत्कालीन चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर ने खुल कर तारीफ की थी।
टीचर भर्ती घोटाले में 10 साल की सज़ा पाने वाले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला की अपील को उन्होंने पहली सुनवाई में ही खारिज कर दिया था।
मद्रास हाई कोर्ट में जज रहते विश्विद्यालयों में वैदिक ज्योतिष को विषय बनाने की मंजूरी दी। जम्मू-कश्मीर के चीफ जस्टिस रहते राज्य भर का दौरा किया। लोगों ने न्याय के प्रति भरोसा बढाने की कोशिश की।
श्री श्री रविशंकर
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री पहले भी इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर चुके हैं। हिंदू पक्ष के एक बड़े वर्ग के साथ मुस्लिम पक्ष में भी एक हद तक उनके लिए स्वीकार्यता है।
श्रीराम पांचु
चेन्नई के बड़े वकील पांचु को मध्यस्थता का विशेषज्ञ माना जाता है। भारत की अदालती प्रक्रिया में मध्यस्थता को जगह दिलाने में उनका काफी योगदान माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी उन्हें असम-नगालैंड सीमा विवाद समेत कुछ और मामलों में मध्यस्थता का ज़िम्मा सौंप चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थ 1 हफ्ते में अपना काम शुरू कर दें। बातचीत फैज़ाबाद में हो। इसके लिए जगह और दूसरी ज़रूरी सुविधाएं उत्तर प्रदेश सरकार दे। यानी मध्यस्थता की इस प्रक्रिया में होने वाला खर्च यूपी सरकार को उठाना होगा। कोर्ट ने मध्यस्थों को ये अधिकार दिया है कि वो ये तय करें कि प्रक्रिया किस तरह चलेगी। अगर वो कुछ और लोगों को अपनी टीम में शामिल करना चाहते हैं, तो इसकी उन्हें इजाज़त है।
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