मुंबई। गजलें अरब से चलीं, ईरान होती हुई हिन्दुस्तान की सरजमीं पर आहिस्ता – आहिस्ता अपने कदम रखे और हिन्दुस्तानी तहजीब ओढ़कर निखालिस हिन्दुस्तानी बन गईं। गजलों ने जब हिन्दुस्तानी संगीत से श्रृंगार किया तो इनकी खूबसूरती और बढ़ गई। अब यही गजलें फनकारों के गले से अपनी पूरी सजधज के साथ निकलती हैं तो सुननेवालों के दिलों पर जादुई असर होता है। ऐसा ही एक जादुई असर वाला मौका था रविन्द्र नाट्य मंदिर सभागार में रंजन संगीत के बैनर तले रंजन देबनाथ रंज की गजल गायिकी का। देबनाथ की लिखी गजलें, नज्में, कुछ सूफी कलाम और भक्ति गीत उन्हीं की कंपोजीशन और उन्हीं की गायिकी में संपन्न हुआ।
रंजन आम फहम की शायरी करते हैं, जिसमें हर आदमी अपनी जिंदगी को महसूस कर सके। उनकी शायरी में इश्क – ओ – मोहब्बत है, जिन्दगी का दर्द है और खुशियां भी। सुंदर धुनों के साथ अच्छी गायिकी पेश की गई। इस आयोजन में सम्माननीय अतिथियों महशूर गजल गायक अशोक खोसला, ठुमरी क्वीन पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष डॉ. शीतलाप्रसाद दुबे, वरिष्ठ पत्रकार व साहित्य गंगा के संपादक राकेश दुबे की उपस्थिति से चार चांद लगा। दीप प्रज्ज्वलन के बाद रंजन संगीत की ओर से सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में मशहूर फिल्म निर्देशक शुभंकर घोष, सुर सिंगार संसद के महासचिव एम के पटेल, गायिका छाया साखरे, मशहूर संगीत अरेंजर अजय मदान मुख्य रूप से उपस्थित हुए। आनंद सिंह ने सुंदर संचालन से आयोजन को समृद्ध किया।
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