मुंबई। ओएलपीएस स्कूल के हीरक जयंती के अवसर पर शिक्षारत छात्रों व उनके अभिभावकों के अलावा देश विदेश से आए इसी स्कूल के पूर्व छात्रों का कलाकारों ने भरपूर मनोरंजन कराया। रंगारंग कार्यक्रम की शुरूआत संगीतकार ब्रायन फर्नांडिस, रशिका शेखर और राम संपत ने किया। वहीं संगीतकार शंकर महादेवन व उनके पुत्र शिवम् ने अपने साथ-साथ दर्शकों से हिंदी अंग्रेजी गाने गवाए।
गौरतलब है कि ओएलपीएस स्कूल के पूर्व छात्रों के सहयोग से 60वां स्थापना दिवस (हीरक जयंती) काफी धूमधाम से मनाया गया। हीरक जयंती के मौके पर अमेरीका से अल्वीन फर्नांडिस के अलावा करीब आधा दर्जन लोग सपरिवार पहुंचे, वहीं लंदन से गोपाल सहित कई परिवार, अफ्रीका से सतीश देशपांडे जैसे कई पूर्व छात्रों ने हीरक जयंती में चार चाँद लगा दिए।
ओएलपीएस के फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित हीरक जयंती के बहाने पूर्व छात्रों को अपने सहपाठियों के साथ रू-ब-रू होने का मौका मिला। इस अवसर पर स्कूल के मैनेजर फादर ग्रेगरी नरोहा, कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. श्रेणिक शाह, सचिव डॉ. कुमार स्वामी और ऑस्टीन कुटीनो ने ओएलपीएस की स्मारिका का विमोचन किया। फादर नरोहा ने देश विदेश से समारोह में शामिल होने आए छात्रों की काबलियत को सराहा।
उल्लेखनीय है कि चेंबूर के आवर लेडी ऑफ परपेचुअल सुकोर हाई स्कूल (ओएलपीएस) की स्थापना 1957 में हुई थी। इस लिहाज से यह वर्ष ओएलपीएस परिवार के लिए विशेष है। क्योंकि हीरक जयंती समारोह के बहाने देश विदेश में रह रहे यहां के छात्रों ने सपरिवार यहां पहुंच कर अपने पुराने दिनों को याद किया। बता दें कि संगीतकार शंकर महादेवन की शिक्षा इसी स्कूल में हुई है।
1957 से अब तक लगभग 15,000 से अधिक छात्रों को शिक्षा प्रदान करने वाले ओएलपीएस का हीरक जयंती यानी की 60 साल पूरे हो गया। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के उपनगर चेंबूर की हरित व प्रकृति की सुंदर वादियों में चल रहे ओएलपीएस सबसे प्रतिष्टित शैक्षणिक संस्थान है। मौजूदा समय में इस स्कूल में करीब 5000 छात्र शिक्षारत हैं। ओएलपीएस की प्रधानाचार्य सिस्टर जेसिन्टा हैं।
ओलपीएस स्कूल के मैदान पर शंकर महादेवन, राम संपत, डैरेन दास, रशिका शेखर, शिवम् महादेवन और ब्रायन फर्नांडिस जैसे सितारों ने दर्शकों का मन मोह लिया व उन्हें भी डांस फ्लोर पर आने को मजबूर कर दिया। इस समारोह की आमदनी को स्कूल प्रबंधन और विभिन्न टिकाऊ परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा। इसके अलावा जरूरतमंद छात्रों की शिक्षा पर खर्च होगा। साथ ही आर्थिक तंगियों से जूझ रहे छात्रों की मदद और सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए चिकित्सा सहायता भी की जाएगी।
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