रोजगार के लिए बिहार से तेलंगाना रवाना
संतोष झा/ मुजफ्फरपुर (बिहार)। बिहार (Bihar) में खगड़िया रेलवे स्टेशन से 7 मई की अहले सुबह 3.45 बजे श्रमिक विशेष ट्रेन से रोजगार के लिए तेलंगाना (Telangana) के लिंगमपल्ली शहर गए। इनमें अधिकांश मजदूर बेलदौर व चौथम के हैं। हालांकि खगड़िया रेलवे स्टेशन से 1,080 मजदूरों के लिए टिकट काटने की बात कही गई है।
रोकने की पहल कर रहे कई प्रदेश
तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और गोवा श्रमिकों को रोकने की पहले से ही अपील कर रहे हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने 8 मई को प्रवासी श्रमिकों से राज्य में टिककर औद्योगिक गतिविधियों को बहाल करने में सहयोग देने का आग्रह किया है। आलोचना के बाद वापसी के इच्छुक श्रमिकों को उनके गृह राज्य भेजने के इंतजाम किए गए हैं।
हरियाणा सरकार श्रमिकों का भरोसा जीतने में जुटी
हरियाणा सरकार नहीं चाहती कि यहां रहने वाले दूसरे प्रदेशों के श्रमिक और फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर अपने घरों को वापस लौटे। हरियाणा में 20 लाख से ज्यादा लोग दूसरे प्रदेश के विभिन्न व्यापार में काम करते हैं। हरियाणा से सिर्फ 45 से 47 हजार दूसरे राज्यों के लोग ही घरों को लौटने के लिए तैयार हुए हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जिला उपायुक्तों को भी निर्देश दिए हैं कि वह मजदूरों को यह समझाने की कोशिश करें कि जब वह अपने प्रदेश लौटेंगे तो वहां उन्हें पहले 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा। उसके बाद उनके सामने रोजगार का संकट रहेगा। वापस लौटने में भी परेशानी हो सकती है।
रियल एस्टेट और इंफ्रा पर सबसे ज्यादा असर
कोरोना महामारी से डरे मजदूरों का देशभर में पलायन से सबसे अधिक असर रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पर हुआ है। रियल एस्टेट कारोबारियों के अनुसार लॉकडाउन में ढील के बावजूद काम शुरू नहीं हो पा रहा है, क्योंकि कुशल श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं। इससे प्रोजेक्ट के पजेशन और घरों की चाबी मिलने में भी देरी हो सकती है।
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