धनंजय प्रताप सिंह/ सिवान (बिहार)। औसतन छपरा, सिवान और गोपालगंज जिला के अपराधियों का सेफ जोन सिवान का उड़ानपुल बन गया है। इन तीनों जिला के अधिकांश अपराधियों द्वारा विभिन्न खतरनाक घटनाओं को अंजाम देने के लिए सिवान के उड़ान पुल का ही सहारा लिया जा रहा है। इसकी खास वजह अंधेरे में डूबा उड़ानपुल को माना जा रहा है।
खबर के मुताबिक आंदर ढाला के उड़ानपुल को सिंगापुर की तरह जगमग करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर इसके दोनों तरफ स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चला। महज चंद महीनों में ही इसकी एक-एक बत्तियां बुझना शुरू हुई और अब यहां अंधेरे का साम्राज्य है। यह उड़ानपुल अपराध के लिहाज काफी संवेदनशील भी माना जाता रहा है। क्योंकि शातिर अपराधियों द्वारा कई घटनाओं को अंजाम देने के लिए इसी उड़ानपुल का इस्तेमाल किया गया है।
गौरतलब है कि पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या भी यही हुई थी, लेकिन शासन और प्रशासन द्वारा इसकी सुध नहीं ली जाती। इस उड़ानपुल पर अवसर अंधकार होने के कारण लोग इसका इस्तेमाल करने में हिचकीचाते हैं। इतना ही नहीं रात के समय लोग डर से इस रास्ते पर नहीं आते। जबकि यहां से महज कुछ ही दूरी पर डीएवी कॉलेज मोड़ और शांति वट वृक्ष है, जहां काफी चहल पहल रहती है।
दूसरी तरफ अंधेरा होने के कारण यहां दुर्घटना का डर भी हमेशा बना रहता है। क्योंकि नो इंट्री के दौरान शहर के बाइपास से सभी बड़ी गाड़ियों का आना-जाना इसी रास्ते से होता है। कई बार बिजली विभाग द्वारा इसमें कनेक्शन जोड़ा गया लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा ट्रांसफार्मर पर ओवर लोड होने की दुहाई देकर इसके कनेक्शन को कटवा दिया जाता है।
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