संतोष कुमार झा/ मुजफ्फरपुर (बिहार)। मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिला के हद में सदर थाना के दीघरा से डकैती के दौरान किराना दुकानदार की बेटी को अगवा किए जाने के मामले में बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा और सदस्य नीलम साहनी 9 सितंबर को मुजफ्फरपुर पहुंची। मामले की छानबीन के दौरान आयोग की अध्यक्षा ने सदर थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अध्यक्षा ने कहा कि घटना की रात सदर थाने की पुलिस अगर मुस्तैदी से कार्रवाई करती तो अगवा बेटी को अपराधी बाहर नहीं ले जा पाते।
बता दें कि घटना का संज्ञान लेते हुए महिला आयोग की टीम ने दीघरा जाकर पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। अध्यक्षा और सदस्य खुद किशोरी के बीमार पिता से उनके कमरे में जाकर बात की। मिलने के बाद बाहर निकली अध्यक्षा दिलमणि मिश्रा ने कहा कि परिजनों के कहने पर भी सदर थाना पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की। उस रात अगर जिले की सीमा को सील कर दिया गया होता तो बेटी को अपराधी बाहर नहीं ले जा पाते।
ज्ञात हो कि बीते 3 सितम्बर की रात को किराना दुकनदार के घर में घुसे 5 नकाबपोश डकैतों ने लाखों की लूट की और 16 साल की नाबालिग लड़की को अगवा कर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग की अध्यक्षा ने राज्य भर के थानों की पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया और कहा कि थाने की पुलिस कमज़ोर लोगों की बातें जल्दी नहीं सुनती है।
इधर स्थानीय रहिवासियों के आक्रोश को शांत करने के लिए जिला पुलिस ने जो 48 घंटे का वक्त दिया था वह कब का खत्म हो चुका है। घटना के 6 दिन बीत जाने के बाद भी अगवा बेटी को बरामद करने में मुजफ्फरपुर पुलिस अबतक नाकाम है। इससे परिवार दहशत में है साथ ही मुजफ्फरपुर में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
दरअसल डर और गुस्से की वजह यह है कि इसी तरीके से मुजफ्फरपुर में नवरुणा नाम की लड़की को अगवा किया गया था। शुरुआत में पुलिस ने उसे हल्के में लिया था। बाद में उसकी हत्या हो गई। सीबीआई जांच का भी कोई खास नतीजा आज तक नहीं निकल पाया है।
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