एस. पी. सक्सेना/बोकारो। व्यवहार न्यायालय बोकारो के विशेष न्यायाधीश सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवेश कुमार त्रिपाठी की अदालत ने 15 अक्टूबर को पोक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) के तहत दायर मामले (पोक्सो 45/2024) में विचारण के पश्चात साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया।
यह फैसला पोक्सो एक्ट के विशेष कोर्ट ने सुनाया, जिसमें आरोपी आकाश मुंडा के अधिवक्ता वरीय वकील रणजीत गिरि द्वारा पेश किए गए तर्कों को सही ठहराते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। अधिवक्ता रणजीत गिरि के अनुसार उनके मुवक्कील आरोपी शिक्षक आकाश मुंडा पर एक नाबालिक लड़की को भागने का आरोप लगा था।
अधिवक्ता गिरि ने बताया कि घटना अप्रैल 2024 की है, जब बोकारो के एक आवासीय इलाके में एक नाबालिक लड़की ने शिक्षक आकाश मुंडा पर पोक्सो एक्ट की धारा 8 और 12 एवं 363/366ए आईपीसी के तहत बोकारो के सेक्टर बारह थाना में कांड क्रमांक 48/24 शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने बिना जांच किए आरोपी मुंडा को गिरफ्तार कर लिया था और मामला विशेष अदालत में विचाराधीन था।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए थे, लेकिन मुंडा के बचाव पक्ष के वकील गिरि ने दावा किया कि मामला बनावटी था और भयादोहन करने के नियत से आरोप लगाया गया था। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में निर्दोष को सजा नहीं दी जा सकती। साक्ष्यों की समीक्षा के बाद मुंडा को रिहा कर दिया गया।
न्यायालय के इस फैसले के बाद आकाश मुंडा के परिवार ने खुशी जाहिर की। उनके भाई महेश मुंडा ने कहा कि हमारा भाई निर्दोष है। यह फैसला न्याय की जीत है।
सनद रहे कि पोक्सो एक्ट 2012 में लागू हुआ था, जो नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों को रोकने के लिए बनाया गया था। इस कानून के तहत अपराधों की सजा कड़ी है, लेकिन यदि साक्ष्य अपर्याप्त हो या आरोपी निर्दोष साबित हो, तो रिहाई संभव है।
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